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फारूख अब्दुल्ला की नजरबंदी को वाइको ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी

फारूख अब्दुल्ला की नजरबंदी को वाइको ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी

एमडीएमके के संस्थापक वाइको ने मोदी सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूख अब्दुल्ला के अब तक नजरबंद रखे जाने को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है.

खुद को फारूख अब्दुल्ला का दोस्त बताते हुए वाइको  ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी याचिका में कहा है कि केद्र सरकार को कोई हक नहीं है कि वो एक पूर्व मुख्यमंत्री को उसके कानूनी और नागरिक अधिकारों से लगातार वंचित रखे.

इस राज्यसभा सदस्य का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट अधिकारियों को आदेश दे कि अब्दुल्ला को तुरंत हाजिर किया जाए और उन्हें

वाइको ने अपनी याचिका में कहा है कि अधिकारियों को आदेश दिया जाए कि अब्दुल्ला को तुरंत हाजिर किया जाए और उन्हें तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री सीएन अन्नादुरई के जन्मदिन पर  15 सितंबर को चेन्नई में आयोजित होने वाले ‘शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक’  सम्मेलन में शामिल होने से न रोका जाए.

वाइको ने कहा कि उन्होंने 29 अगस्त को अधिकारियों को इस संबंध में पत्र लिखा है कि वह अब्दुल्ला को चेन्नई जा कर सम्मेलन में हिस्सा लेने की अनुमति दें लेकिन इसका उन्होंने कोई उत्तर नहीं दिया.

उन्होंने बताया कि उन्होंने चार अगस्त को फोन पर अब्दुल्ला से बातचीत की थी और जम्मू कश्मीर के इस पूर्व मुख्यमंत्री को 15 सितंबर को आयोजित होने वाले कार्यक्रम में शामिल होने का न्यौता दिया था.

संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू कश्मीर को दिए गए विशेष दर्जे को केंद्र सरकार ने पांच अगस्त को वापस ले लिया था और राज्य को दो केंद्र शाषित प्रदेशों- जम्मू कश्मीर एवं लद्दाख में बांट दिया था और तभी से वहां के नेता नजरबंद हैं.

 

 

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