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उर्जित पटेल अब नहीं रहे  मोदी के ‘यस-मैन’

उर्जित पटेल अब नहीं रहे मोदी के ‘यस-मैन’

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के यस मैन कहे जाने वाले  रिजर्व बैंक गवर्नर उर्जित पटेल से भी मोदी सरकार की तनातनी शुरु हो चुकी है और हालत इतनी बिगड़ चुकी है कि सरकार और बैंकिंग रेगुलेटर के बीच बातचीत तक बंद हो चुकी है.

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर ऊर्जित पटेल और मोदी सरकार में तमाम मुद्दों पर मतभेद इतने तीखे हो चुके हैं कि अब सरकार में बैठे लोग कहने लगे हैे कि इनसे तो पिछले गवर्नर रघुराम राजन ही बेहतर थे .

लेकिन पिछले गवर्नर पर विदाई लेने के लिए भरपूर दबाव बनाने वाली मोदी सरकार अब नए गवर्नर को हटाने का जोखिम नहीं उठा सकती क्योंकि इससे सरकार की साख पर पबड़ा गलत असर पड़ेगा लेकिन यह तय है कि अगले साल सितंबर में  तीन साल का कार्यकाल पूरा कर रहे उर्जित पटेल को अब शायद ही कार्यकाल का विस्तार मिले.

आरबीआई के डिप्टी गवर्नर विरल अचार्य ने हाल ही में इस तनातनी की ओर इशारा करते हुए  सरकारी दखलंदाजी से बैंक की स्वायत्तता को लेकर चिंता ज़ाहिर की थी और कहा था कि यह किसी के हक़ में नहीं है.

एक कार्यक्म में बोलते हुए तो पूरी सख्ती से अचार्य ने कह डाला था कि जो सरकार अपने केंद्रीय बैंक को काम करने के लिए माहौल नहीं देती वह आर्थिक संकट में फंसती ही है.

कहा जा रहा है कि कम से कम आधा दर्जन मामलों को लेकर  2018 में सरकार और आरबीआई में मतभेद उभरे है जिसमें  नीरव मोदी की धोखाधड़ी ,  बैंकों के खराब लोन को लेकर बरती गई सख्ती और सरकारी बैंकों पर नज़र रखने के लिए ज्यादा शक्तियां मांगे जाने के मुद्दे भी शामिल हैं..

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