Share
मंहगे गैस सिलिंडरों के सामने बौनी साबित होती उज्जवला योजना

मंहगे गैस सिलिंडरों के सामने बौनी साबित होती उज्जवला योजना

अच्छी होने के बाद भी जितना बढ़चढ़कर पीएम मोदी अपनी योजना का प्रचार करते रहते हैं धरातल पर वह उतनी कामयाब तो नजर नहीं आ रही क्योंकि पचास से सौ रुपयों की दिहाड़ी पर गुजारा करने वाला देश के गरीब तबके के लिए भी आठ सौ का सिलिंडर भराना सम्भव ही नहीं है.

इन चुनावों में केवल प्रधानमंत्री ही नहीं बल्कि पूरी भाजपा उज्जवला योजना को देश की महिलाओं की किस्मत बदलने वाली बताते हुए उसके गीत गा रही है पर इसी चुनाव मेंं मोदी की तरह अपनी मां के सहारे खुद को हिट करने के चक्कर में भाजपा के बड़बोले प्रवक्ता सम्बित पात्रा ने एक फोटो ट्वीट करके सरकारी दावो में पलीता लगा दिया.

उड़ीसा के पुरी से चुनाव लड़ रहे सम्बित पात्रा ने वीडियो और फोटो शेयर करके लिखा है कि मां के हाथ का बना खाना खाया खिलाया और इनकी सेवा ही सबसे बड़ी सेवा है लेकिन वो यह ध्यान देना भूल गए कि उनकी मां उज्जवला योजना के बावजूद चूल्हे पर ही खाना पकाती दिख रही है .

जाहिर है इस फोटो को विपक्ष लपक ही लेगा ओर कांग्रेस ने इसे यह कहते हुए कि पेट्रोलियम मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान भी उड़ीसा के हैं तब वहां उज्जवला योजना की ये हालत है तो फिल्म कलाकार नाना पाटेकर ने भी इस पर तीखी टिप्पणी कर दी.

कांग्रेस तो पहले से ही उज्जवला योजना को पूरी तरह फ्लाप बताते हुए दावा करती है कि दस करोड़ भारतीय अभी भी किरोसिन पर ही खाना बना रहे हैं तो यह भी सच है कि प्रधानमंत्री ने 2016 में यूपी के बलिया मेंं जब इस योजना को शुरु करने का ऐलान किया था तो देश के आठ करोड़ परिवारों को रसोई गैस कनेक्शन देने का ऐलान किया था और इसमें से इस साल जनवरी तक के सरकारी आंकड़े बताते हैं कि छह करोड़ को ये कनेक्शन दिया भी जा चुका है.

सरकार के ही अपने आंकड़े ये भी बताते है कि कम से कम चार करोड़ परिवार ऐसे हैं जिन्होंने एक बार सिलेंडर मिल जाने के बाद उन्हें दोबारा नहीं भरवाया क्योंक उनके लिए आठ सौ का सिलेंडर खरीदना बहुत मंहगा है जबकि खाना बनाने के लिए उन्हें लकड़ी या उपले तो फोकट में मिल जाते हैं.

सच्चाई यह भी है कि मोदी सरकार उज्जवला योजना में भले ही मुफ्त रसोई गैस कनेक्शन देने की बात करे और उसके लिए हर कनेक्शन 16 सौ रुपयों की सब्सिडी भी दे रही हो पर गरीब परिवारों की महिला के नाम दिया जाने वाला ये कनेक्शन फिर भी गरीबो को मुफ्त नहीं पड़ता क्योंकि डीलर गैस के चूल्हे सहित बाकी सारी चीजों की कीमत वसूलता और इसके लिए तेल कम्पनियों ने यह व्यवस्था कर रखी है कि वो उपभोक्ताओं को फाइनेंस कर देती है और हर सिलेंडर पर पूरी कीमत के बाद मिलने वाली सब्सिडी की रकम से इसकी कीमत काट ली जाती है.

इस व्यवस्था से हो ये रहा है कि गरीब परिवारों को रियायती सिलेंडर भी एक साल तक पूरी कीमत के पड़ते हैं और वो इसे भरवाने की हिम्मत ही नहीं करते.

https://twitter.com/i/status/1112247002673233922

ये सही है कि योजना महिलाओ की सेहत और उन्हें रसोई के धुएं से बचाने के लिए महत्वपूर्ण है पर गैस की सिलेंडर की कीमत के सामने ये अच्छी योजना भी घुटने टेकने की हालत में पहुंच चुकी है.

Spread the love

Leave a Comment