Share
कहीं राज्य सभा में फिर न अटक जाए तीन तलाक बिल….

कहीं राज्य सभा में फिर न अटक जाए तीन तलाक बिल….

मोदी सरकार ने आज अपने दूसरे कार्यकाल के पहले बिल के रूप में भले ही तीन तलाक बिल लोकसभा में पेश कर दिया पर उसे राज्यसभा में पारित कराने के लिए अभी भी उसके पास उच्च सदन में जरूरी बहुमत नहीं है.

लोकसभा में इस बिल को विपक्ष के गम्भीर एतराजों के बीच मतदान कराकर सरकार ने एक पेशबंदी के तहत पेश किया ताकि जनता में ये साफ संदेश पहुंच जाए कि मौजूदा सरकार  मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए कितनी उतावली है.

तीन तलाक बिल को पेश करने पर  लोकसभा की अनुमति लेने के लिए हुए मतदान में प्रस्ताव के पक्ष मेंं 186 और इसके खिलाफ 74 वोट पड़े.

लोकसभा में सत्तापक्ष के पास जबरदस्त बहुमत है इसलिए इस बिल को यहां से पास होने में तो कोई संदेह नहीं है पर राज्यसभा में तेलुगू देशम पार्टी के चार सांसदों के भाजपा में  विलय कराने के बाद भी इस उच्च सदन में सत्ता पक्ष बहुमत के आंकड़े से 18 वोट  पीछे है.

वैसे संसद मे इस बिल का मुखर विरोध करते हुए कांग्रेस के शशि थरूर ने जहां सिविल और क्रिमिनल कानून  को मिला दिए जाने का विरोध किया वहीं एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी  ने कहा कि गम्भीर प्रकृति का अपराध करने पर हिन्दू पुरुष को एक साल की सजा पर तीन तलाक बिल पर मुस्लिम पुरुषों को तीन साल की सजा मिलना कैसे जायज ठहराया जा सकता है.

विपक्षी सांसदों ने कहा कि सरकार मुस्लिम महिलाओं से हमदर्दी रख रही है यह अच्छी बात है पर मुस्लिम पुरुषों के साथ दुश्मनों जैसा व्यवहार किया जाना क्या जरूरी है.

कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि सदन में सरकार का काम जनहित में कानून बनाना है उस पर बहस करना अदालत का काम है इसलिए यहां अदालत का काम करने की कोशिश न की जाए.

Spread the love

Leave a Comment