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टाइम मैग्जीन के कवर पर मोदी लेकिन खुश होने की जरूरत नहीं

टाइम मैग्जीन के कवर पर मोदी लेकिन खुश होने की जरूरत नहीं

मशहूर टाइम मैग्जीन ने तीसरी बार अपने मुख-पृष्ठ पर नरेन्द्र मोदी को जगह दी है पर इस बार उनके लिए खुश होने की कोई बात नहीं है क्योंकि उनको मैग्जीन ने कवर पर ही उनके लिए बांटने वाले सबसे बड़े नेता का स्लोगन दिया गया है.

मैग्जीन ने जो लीड आर्टिकल छापा है उसका शीर्षक भी इस बात पर है कि क्या भारत मोदी जैसे नेता को अगले पांच सालों के लिए और बर्दाश्त कर सकता है और इस लेख में खुलकर उदाहरणों समेत लिखा गया है कि किस तरह इस नेता पांच सालों के शासन में अपनी हिन्दुत्व की राजनीति के सहारे भारत में अन्य समुदायों की जिन्दगी दुश्वार बनाई है.

पत्रकार आतिश तसीर के इस लेख में अमेरिका, ब्रिटेन, ब्राजील और टर्की के साथ भारत की तुलना करते हुए लिखा गया है कि किस तरह लोकतांत्रिक व्यवस्थाएं लोकप्रियता पाने के सस्ते तौर-तरीकों के पीछे -पीछे भागते भागते देश के साम्प्रदायिक सौहार्द को ही बिगाड़ देती हैं.

लीड लेख में लिखा गया है कि किस तरह मोदी शासन ने पांच साल में सत्ता के मूल चरित्र से लेकर, अल्पसंख्यकों और उनकी संस्थाओं और यहां तक कि मीडिया को भी बदल कर रख दिया और आर्थिक मोर्चे पर फेल होने के बाद उनका मौजूदा शासन किस तरह धार्मिक राष्ट्रवाद के सहारे भारतीय समाज मेंं लगातार जहर परोसने में जुटा है.

मैग्जीन ने चुनावों पर भी टिप्पणी करते हुए लिखा है कि एक ओर मोदी हैं जो 2014 में जनता को दिखाए गए बड़े बड़े वादों को पूरा करने में फेल होने के बाद अब दक्षिण कोरिया की तरह हिन्दुत्व पुनरुद्धार को राष्ट्रीय अस्मिता से जोड़कर और देश के विघटन का खतरा दिखाकर फिर से चुने जाने की अपीलें कर रहे हैं तो दूसरी ओर कांग्रेस और दूसरे दल हैं जो मोदी की तमाम मसलों पर बेहतर काट पेश करने की बजाए किसी तरह सिर्फ उसे ही सत्ता से हटाने के लिए चुनाव मैदान में जोर लगा रहे हैं.

उल्लेखनीय है कि मोदी इससे पहले 2012 में टाइम के कवर पर तब आए थे जब वो गुजरात के मुख्यमंत्री थे और हिन्दूवादी नेता के तौर पर उभरे थे जबकि 2015 में देश के प्रधानमंत्री बनने के बाद पत्रिका ने एक बार फिर उन्हें कवर पर लेकर उनकी शान में कसीदे पढ़े थे.

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