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बातचीत करने वाले  तीन  विशेषज्ञों ने ही मोदी सरकार के दावों में पलीता लगाया

बातचीत करने वाले तीन विशेषज्ञों ने ही मोदी सरकार के दावों में पलीता लगाया

रफाल डील को लेकर  मोदी सरकार भले ही ये दावे करती रही हो कि उसने कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए सरकार से बेहतरल डील की है और आज संसद में सीएजी की रिपोर्ट पेश करवाकर अपनी बात को और वजनदार बनाने की कोशिश की हो पर अब राफेल पर सौदेबाजी करने वाले सात सदस्यीय भारतीय दल में से तीन विशेषज्ञों ने ही सरकार के इस दावे में पलीता लगा दिया है.

अंग्रेजी अखबार  द हिंदू द्वारा आज किए गए नए खुलासे के अनुसार राफेल पर फ्रांस से बातचीत करने वाले  दल में शामिल रक्षा मंत्रालय के तीन वरिष्ठ अधिकारी साफ कह रहे हैं कि उन्हें नहीं लगता कि मोदी सरकार कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए सरकार से बेहतर शर्तों पर  फ्रांस से राफेल खरीदने में कामयाब हुई है.

इन तीन अफसरों में भारतीय लागत लेखा सेवा के संयुक्त सचिव  स्तर के एक अधिकारी सलाहकार (लागत)  एमपी सिंह, वित्तीय प्रबंधक (वायु) एआर सुले, संयुक्त सचिव और अधिग्रहण प्रबंधक (वायु) राजीव वर्मा ने उसी समय अपने एतराज जताते हुए एक डिसेंट नोट सरकार को दे  दिया था जिसमें   नई डील को को बेहतर बताए जाने और इससे राफेल विमान देश को जलदी मिल जाने की बात को खारिज कर दिया गया था.

इस आठ पेज के नोट को फ्रांसीसी टीम के साथ बातचीत पूरी होने के तीन महीने बाद और फ्रांस सरकार के साथ समझौते पर दस्तखत होने के  तीन महीने पहले लिखा गया था.

रिपोर्ट के मुताबिक, ‘नए रफाल  की   62 हजार 976 करोड़ रुपये कीमत पर सवाल उठाते हुए विशेषज्ञों ने रिपोर्ट में कहा था कि ‘फ्रांस द्वारा दी गई कीमत तर्कसंगत नहीं है और इसे  लड़ाकू विमान के लिए मिले  ऑफर मूल्य की तुलना में ‘बेहतर’ नहीं कहा जा सकता,  इसलिए ये संयुक्त वक्तव्य के दावे पर भी खरा नहीं उतरता.

द हिंदू अखबार के सम्पादक एन राम ने अपनी खबर में   लिखा है कि इन विशेषज्ञों ने यह भी कहा था कि  नए सौदे में 36 फ्लाईवे रफाल विमानों में से पहले 18 की डिलीवरी का समय मूल खरीद प्रक्रिया में 18 फ्लाईवे एयरक्राफ्ट के लिए दिए गए प्रस्ताव की तुलना में धीमा है.’

 

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