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केंद्र नहीं चाहता राफेल दस्तावेजों का परीक्षण अदालत करे, निर्णय सुरक्षित

केंद्र नहीं चाहता राफेल दस्तावेजों का परीक्षण अदालत करे, निर्णय सुरक्षित

सुप्रीम कोर्ट ने आज केंद्र के इस एतराज पर निर्णय सुरक्षित रखा कि पुनर्विचार याचिका के साथ दाखिल किए गए दस्तावेज राफेल की गोपनीय फाइल के है और अदालत के पास इन्हें परीक्षण के लिए स्वीकार करने का अधिकार ही नहीं है.

इस मामले में बहस शुरु करते हुए अटार्नी जनरल ने कहा कि अदालत में दाखिल किए गए राफेल के दस्तावेज सरकारी गोपनीयता कानून के तहत गोपनीय दस्तावेज और ये सूचना के अधिकार के भी दायरे के बाहर है

हालांकि न्यायाधीश के एम जोजेफ ने इसका प्रतिवाद करते हुए कहा कि सूचना के अधिकार कानून की धारा 22 जहां सरकारी गोपनीयता कानून को निष्प्रभावित करती है वहीं इस कानून की धारा 24 के तहत रक्षा और खुफिया प्रतिष्ठान भी मानवाधिकारों के मामलों मे इस कानून के दायरे से बाहर नहीं हैं.

एक पुनर्विचार याचिका दाखिल करने वाले वकील प्रशांत भूषण ने भी कहा कि जो कागजात अदालत में दाखिल किए गए हैं उन्हें एक बड़ा अखबार प्रकाशित कर चुका है इसलिए ये पहले से जनता के बीच हैं और धारा 123 सुबूत कानून सिर्फ बिना छपे कागजातों को ही सुबूत के तौर पर पेश करने की मनाही करता है.

उन्होंने अमेरिका के पेंटागन पेपर केस का भी उदाहरण दिया कि वहां की सर्वोच्च अदालत ने वियतनाम युद्ध से जुड़े दस्तावेजों तक को प्रकाशित करने की छूट दे दी थी क्योंकि वहां की सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर दागदार अफसरों को बचाने की कोशिश कर रही थी.

अन्य याचियों अरुण शोरी और यशवन्त सिन्हा ने अटार्नी जनरल का शुक्रिया अदा किया कि आखिर उन्होंने ये तो माना कि अदालत में दाखिल दस्तावेज असली फाइल की फोटो कापी हैं.

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