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मोदी पर बनी फिल्म पर रोक लगाने से सुप्रीम  कोर्ट का इन्कार

मोदी पर बनी फिल्म पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इन्कार

नरेन्द्र मोदी पर बनी फिल्म पीएम मोदी पर चुनाव से पहले वोट लगाने से सुप्रीम कोर्ट ने ये कहते हुए इन्कार कर दिया कि इस फिल्म पर एतराज करने का उचित फोरम सुप्रीम कोर्ट नहीं है और वैसे भी इस फिल्म को अभी तक सेंसर बोर्ड की मंजूरी भी नहीं मिली है.

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने इस याचिका को महत्वहीन मानते हुए कहा कि बेकार की चीजों में बहुत समय बर्बाद हो चुका है और फिल्म पर किसी भी तरह का एतराज करने की सही जगह या तो सेंसर बोर्ड है या फिर चुनाव आयोग.

कांग्रेस समर्थक अमित पंवार की इस याचिका पर बहस करते हुए वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि फिल्म को भले ही सेंसर बोर्ड का प्रमाण पत्र नहीं मिला है पर इसके गीतकार प्रसून जोशी खुद सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष हैं और भाजपा के वाणिज्य प्रकोष्ठ के संयोजक आनन्द पंडित, भाजपा के सक्रिय सदस्य सुरेश ओबेराय और पीएम मोदी की टीम में शामिल आचार्य मनीष इसके निर्माता हैं.

जिस तरह से ये फिल्म बनाई गई है और उसे चुनावों से पहले रिलीज करने की कोशिश की जा रही है उससे साफ है कि मतदान को प्रभावित करने की कोशिश है क्योंकि फिल्म में वही कहानी है जो भाजपा नेता खुद बताते हैं और उन्हें चाय वाले से पीएम बनते दिखाया गया है साथ ही 2014 के चुनाव में भाजपा ने प्रचार में जिस गाने को इस्तेमाल किया था वो भी फिल्म में शामिल है.

सिंघवी का कहना है कि यही नहीं फिल्म में चौकीदार शब्द का भी इस्तेमाल किया गया है जिसे पीएम ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल में जोड़ा है और फकीर हूं झोला उठाकर चल दूंगा जैसे कई वाक्य डायलाग बनाए गए हैं जो पीएम मोदी बोलते रहे हैं.

चीफ जस्टिस ने कहा कि चुनाव में अगर याची को लगता है कि फिल्म सच में असर डाल रही हेै तो वे इस मामले को फिर ला सकते हैं हम मतदान के दो दिन पहले इसका प्रदर्शन रोकने पर विचार करेगें पर अभी तो ये पूरा मामला ही परिपक्व नहीं कहा जा सकता.

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