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सुप्रीम कोर्ट नोे पूछा जब राफेल का प्रपोजल रद्द कर दिया गया तो डील कैसे फाइनल हुई..

सुप्रीम कोर्ट नोे पूछा जब राफेल का प्रपोजल रद्द कर दिया गया तो डील कैसे फाइनल हुई..

सुप्रीम कोर्ट में आज राफेल डील पर तीन वरिष्ठ जजो की बेंच द्वारा सुनवाई की जा रही है जिसमे जस्टिस जोसेफ ने सरकार से  जानना चाहा है की  जब राफेल का प्रस्ताव ही अप्रैल 2015 में वापस ले लिया गया था और नया प्रस्ताव जारी नहीं हुआ तो पीएम ने  डील होने का ऐलान कैसे कर दिया और डील साइन कैसे हो गई?

हालांकि एटार्नी जनरल ने यह कहकर चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस जोजेफ और जस्टिस कौल की बेंच को संतुष्ट करने की कोशिश की कि डील फाइनल करने के लिए प्रस्ताव का होना जरुरी नहीं है.

राफेल डील की जांच होगी या  नहीं इस पर आज की  लगभग दिनभर चली  सुनवाई  के बाद  सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है.

इस  डील के ऑफसेट नियमों में बदलाव पर सरकार की ओर  से वकील केके वेणुगोपाल ने कहा है कि दसॉल्ट ने अब तक ऑफसेट पार्टनर की अधिकृत जानकारी ही सरकार को नहीं दी  है.

कोर्ट ने सरकार से इस बारे में भी जानकारी तलब की कि सरकार ने आफसेट कम्पनी के नियमों में बदलाव  क्यों किया और इसकी इतनी जल्दी क्यों थी.

कोर्ट  ने आज वायुसेना के दो आला अफसरों एयर मार्शल वीआर चौधरी, कमांडर इन चीफ ईस्टर्न कमांड आलोक खोसला को भी कोर्ट में तलब किया और उनसे राफेल की उपयोगिता को लेकर सवाल जवाब किए.

सुप्रीम कोर्ट में महाधिवक्ता की ओर से यह भी कहा गया कि सरकार को एक  ऐसी कम्पनी की जरुरत थी जो बाकी राफेल एयरक्राफ्ट समय पर बनाकर दे सके और एचएएल इसके लिए सक्षम नहीं थी.

कोर्ट ने आज यह भी पूछा कि भारत  के साथ किन किन देशों के  पास पहले से  राफेल हैं तो सरकार ने बताया कि फ्रांस, कतर और मिस्र के पास ये जहाज अभी हैं.

वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने  कहा कि पूरी प्रक्रिया को दरकिनार कर प्रधानमत्री ने खुद डील फाइनल की है और सरकार के कारण ही फ्रांस की दसाल्ट ने रिलायंस के 240 करोड़ के शेयर  खरीदे हैं.

बहस में अरुण शौरी, आम आदमी पार्टी के नेता संजय  सिंह के वकीलों ने भी भाग लिया.

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