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राहुल गांधी की नागरिकता का विवादः सुप्रीम कोर्ट पहले ही खारिज कर चुका है मोदी सरकार का ये दांव

राहुल गांधी की नागरिकता का विवादः सुप्रीम कोर्ट पहले ही खारिज कर चुका है मोदी सरकार का ये दांव

बीच चुनाव कांग्रेस अध्यक्ष  राहुल गांधी की नागरिकता को लेकर उठा विवाद भाजपा और पीएम मोदी को कितना फायदा पहुंचा पाएगा यह तो नहीं कहा जा सकता पर जिस विवाद पर नोटिस जारी करके केंद्र सरकार ने जवाब तलब किया है उसे तो 2015 में ही सुप्रीम कोर्ट फर्जी बताकर खारिज कर चुका है.

इस बार चुनाव के दौरान सुब्रहमण्यम स्वामी के नोटिस  पर मोदी सरकार ने बाकायदा राहुल गांधी को नोटिस जारी करके एक पखवाड़े के भीतर जवाब मांगा है पर सच्चाई यह है कि इससे पहले भाजपा के महेश गिरी इस मामले को उठा चुके हैं और यही नहीं संसद की आचार समिति भी 2016 में इस पर सुनवाई कर चुकी है.

एक भाजपा परस्त वकील एम.एल. शर्मा तो इस मामले को लेकर 2015 में सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए थेे और उन्होंने शीर्ष अदालत से राहुल गांधी की संसद सदस्यता समाप्त करने की मांग की थी जिसपर संक्षिप्त सुनवाई करके अदालत ने पूरे मामले को ही फर्जी करार दिया था.

उस समय के प्रधान न्यायाधीश एच.एल. दत्तू की अध्यक्षता वाली पीठ ने वकील से पूछा था हम सब जानते हैं राहुल गांधी तो जन्म से ही भारतीय हैं तो आप कैसे अपने दस्तावेजो को प्रामाणिक बता रहे हैं ?”

शर्मा द्वारा सुनवाई पर जोर दिए जाने पर न्यायमूर्ति दत्तू ने शर्मा से कहा था, “मेरी सेवानिवृत्ति के बस दो दिन शेष बचे हैं.आप मुझे मजबूर मत कीजिए कि नहीं तो मुझे आप पर जुर्माना लगाना पड़ेगा”

वैसे ये मामला जब वरिष्ठ भाजपा नेता लाल कृष्ण आडवाणी की अध्यक्षता वाली संसद की आचार समिति के समक्ष 2016 में उठाया गया तो गया था तो राहुल गांधी ने खुद सफाई दी थी कि उन्होंने कभी भी ब्रिटिश नागरिकता पाने की कोशिश नहीं की और यह शिकायत उनकी छवि खराब करने की साजिश है.

हालांकि एक दस्तावेज में राहुल ने खुद को ब्रिटिश नागरिक लिखा था पर उनका कहना है कि वो गलती से हुआ था और कुछ ही दिनों बाद उन्होंने ब्रिटेन सरकार को बता भी दिया था वो गलती से खुद को ब्रिटिश नागरिक लिख गए हैं जो गलत है.

दरअसल यह सारा विवाद 2003 से 2009 के बीच का है जब राहुल ने बैकलाप्स नामक की एक कम्पनी लंदन में खोली थी जिसका दफ्तर बाद में भारत में भी खोला गया था पर यह कंपनी भी कबका बंद हो चुकी है.

बहरहाल वरिष्ठ नेता शरद यादव ने जरूर कहा है कि इस तरह का विवाद चुनाव के दौरान उठाकर भाजपा राजनीति को बहुत निचले स्तर तक ले आई है.

(यह खबर आईएएनएसस और सिंडिकेट की फीड से ली गई और इसमें प्रणाम इंडिया की ओर से कोई खोज खबर नहीं की गई है)

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