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असम के हिरासत केंद्रो पर सुप्रीम कोर्ट सख्तः मुख्यसचिव  हाजिर हों नहीं तो वारंट

असम के हिरासत केंद्रो पर सुप्रीम कोर्ट सख्तः मुख्यसचिव हाजिर हों नहीं तो वारंट

असम के हिरासत केंद्रो को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है वहां के मुख्य सचिव के पास अब अदालत में पेश होने के लिए आठ अप्रैल को आखिरी मौका है और इसके बाद भी अगर वो हाजिर नहीं हुए तो उनके खिलाफ वारंट जारी करकेे उन्हें बुलाया जाएगा.

इस मामले में सोमवार को हुुवई सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि हिरासत केंद्रों और अवैध विदेशियों के मसले पर राज्य सरकार का हलफनामा बेमतलब है और राज्य के मुख्य सचिव के खिलाफ हम अभी ही वारंट जारी कर सकते हैं पर ऐसा सिर्फ सालीसिटर जनरल तुषार मेहता के भरोसे के कारण नहीं कर रहे हैं.

तीन सदस्यीय बेंच ने ये भी कहा कि मुख्य सचिव जब आठ को आएं तो ये सोचकर न आएं कि वो घूमने आ रहे हैं उन्हें यहां तब तक रुकना होगा जब तक हम नहीं कहते.

उल्लेखनीय है कि असम सरकार ने हलफनामे में कहा है कि कोई सत्तर हजार विदेशी राज्य की आबादी में घुलमिल चुके हैं जिसपर कोर्ट ने कहा कि आपके आंकड़े गलत है और अगर ऐसा है तो आप दस साल से क्या कर रहे हैं… पहले आप विदेशियों को बांगलादेश भेजते थे पर अब शायद आप को कुछ समझ आ गई है… आप ये भी नहींं बता पा रहे कि जो अवैध विदेशी दूसरे राज्यों में घुलमिल गए हैं उनका क्या होगा.

कोर्ट ने नाराजगी जताई कि असम में अवैध घुसपैठियों की पहचान के लिए जो ट्रिब्यूनल हैं उनकी संख्या पर्याप्त है या नहीं वहां की सरकार न तो ये बता रही है और न ही यह बता पा रही है कि 2005 के बाद बाहर से जबरिया आ रहे विदेशियों को रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं.

शीर्ष अदालत इस बात से भी नाराज है कि असम सरकार न तो यह बता पा रही है कि राज्य में कुल कितने ऐसे विदेशी हैं , न ही ये कि कितने विदेशियों को वापस भेजा गया है और न ही यह बता पा रही है कि राज्य के छह हिरासत केंद्रों में जो 900 विदेशी रखे गए हैं उनके खिलाफ क्या मामले हैं और उनके मानवाधिकारों के लिए क्या कदम उठाए गए हैं.

सुप्रीम कोर्ट दरअसल इस मामले पर एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी और इस बात को भी लेकर चिन्तित थी कि जो मां-बाप हिरासत केंद्रों में रखे गए हैं उनके बच्चों के लिए क्या व्यवस्था की गई है.

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