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चुनावी काले धन पर सुप्रीम कोर्ट का हथौड़ा, सभी पार्टियां चुनावी बांड की तुरंत ब्योरा दें

चुनावी काले धन पर सुप्रीम कोर्ट का हथौड़ा, सभी पार्टियां चुनावी बांड की तुरंत ब्योरा दें

सुप्रीम कोर्ट ने चुनावों में खुलकर काले धन के इस्तेमाल पर कड़ा फैसला लेतेहुए निर्देश दिए हैं कि पार्टियां अब चुनावी बांड से मिली अघोषित रकम को छुपाए नहीं रख सकेेगी और तीस मई तक हर पार्टी को सीलबंद लिफाफे में चुनाव आयोग में यह ब्योरा देना होगा कि उसे किस इलेक्टोरल बांड से कितनी रकम मिली है.

चुनाव आयोग भी इस सील बंद लिफाफे को नहीं खोलेगा और उसे सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश करेगा जो ये बाद में यह देखेगा कि ये व्यवस्था किसी एक पार्टी के पक्ष में तो नहीं जा रही.

इलेक्टोरल बांडों को लेकर दाखिल पीआईएल में याची एसोसियेशन आफ डेमोक्रेटिक रिफार्म की तरफ से प्रशांत भूषण ने इन पर रोक लगाने की मांग की थी और उनका कहना था कि मोदी सरकार ने इन बांडो को देने वाले का नाम गोपनीय रखने की ऐसी व्यवस्था बनाई है कि उसका नाम न तो चुनाव आयोग को पता चलेगा न ही आयकर विभाग को जबकि इन बांडो को पूरी गोपनीयता रखते हुए कोई भी बैंको से खरीद सकता है और बैंक भी अदालती आदेश के अलावा खरीददार का नाम बताने के लिए बाध्य नहीं है.

याचिका कर्ता ने यह आरोप लगाते हुए कि इस तरह के बाडो का 95 फीसदी भाजपा के पास ही गया है जो सब दलो को चुनावो में समान अवसर देने की मूल भावना के खिलाफ है, इसलिए इन पर तुरंत रोक लगाई जाए.

चुनाव आयोग ने शीर्ष अदालत में यह साफ किया कि वो इन बांडो के खिलाफ नहीं है पर इन्हें जिस तरह गोपनीय रखा गया है वो इसका समर्थन नहीं करता जबकि सरकारी वकील का तर्क था कि पूरे एहतियात बरतते हुए सरकार ने इन बांडो की गोपनीयत बनाए रखी है ताकि चुनाव बेहतर तरीके से लड़े जा सके.

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