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एलईडी लाइटों के खतरनाक प्रभावों से वैज्ञानिक परेशान

एलईडी लाइटों के खतरनाक प्रभावों से वैज्ञानिक परेशान

हमारी उजाले की दुनिया में एलईडी लाइटें इतनी तेजी से कब्जा करती जा रही हैं कि दुनिया में 2020 तक उजाला बिखेरने की सत्तर फीसदी तक जिम्मेदारी हम खुद इनके हवाले कर चुकें होगें.

अच्छी और सस्ती रौशनी के कारण एलईडी लाइटें पूरी दुनिया में कितनी तेजी से छाती जा रही हैं यह इसी से समझा जा सकता है कि सात साल पहले तक हम केवल 11 फीसदी ही एलईडी बल्ब इस्तेमाल करते थे जो अब हमारे घरों के भीतर-बाहर हमारे आधे बल्ब और ट्यूब-लाइट की जगह ले चुके हैं,

लेकिन हाल ही में हुए रौशनी खासकर रंग-बिरंगी रौशनी का जीवों पर होने वाले असर को लेकर हुए अध्ययनों ने जानकारों को परेशानी में डाल दिया है.

साइंस एडवांस में छपे अध्ययन में उपग्रह आधारित सेंसरों का इस्तेमाल करके वैज्ञानिकों की टीम ने यह पता लगाने की कोशिश की एलईडी लाइटों. ओएलईडी और पीएलईडी लाइटों  का इस्तेमाल  करके हम दुनिया को जिस तरह अंधेरा मुक्त कर रहे हैं वो सभी आजन्म कंदराओॆ मे रहने वाले जीवों को छोड़कर सबकी जिन्दगी बर्बाद कर रहा है जिसमें मानव भी शामिल हैं.

एलईडी लाइटों के हानिकारक प्रभावों पर साउदर्न कैलीफोर्निया यूनिवर्सिटी के ट्रैविस लांगकोर की अगुवाई में हुए अध्ययन  बताते हैं कि इस रौशनी का ज्यादा एक्सपोजर ब्रेस्ट और पोस्ट्रेट कैंसर में तेजी से इजाफा हो रहा है.

इसके साथ ही एलईडी लोगों में निद्रा रोग भी पैदा कर रहा  है जिससे अवसाद से जुड़ी आज तेजी से फैल रही तमाम बीमारियों के लिए आधार तैयार हो रहा है.

लाइटिंग को लेकर कैलीफोर्निया में हुए एक सेमीनार में लोगों  से लाइंटिग का इस्तेमाल अवधि और दायरे  यानि जितनी जगह जरुरी हो उतनी जगह ही लाइट रखने तक सीमित करने और अपनी जिन्दगी में अंधेरे की अहमियत को भी नहीं भुलाने की अपील की गई है.

उधर घर के बाहर की दुनिया में अंघेरा मिटा देने की हमारी मूर्खतापूर्ण कोशिशों ने तमाम जानवरों की दुनिया ही बदल डाली है कोई प्रजनन  नही कर पा रहा है तो किसी के अंडों से बच्चे निकलने और उनके समुद्र या तालाब तक पहुंचने मे रुकावटें पैदा हो रही हैं.

अब वैज्ञानिक इस बात का भी पता लगा रहे हैं कि नकली रौशनी में किस रंग

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