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लोकसभा शाहबानों प्रकरण दोहराने की तैयारी में, इस बार मुद्दा सबरीमाला मंदिर

लोकसभा शाहबानों प्रकरण दोहराने की तैयारी में, इस बार मुद्दा सबरीमाला मंदिर

शाहबानों प्रकरण की तरह लोकसभा फिर एक बार सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलटने की तैयारी मेंं और उसे ये मौका दे रहा है केरल का सबरीमाला मंदिर जहां सुप्रीम कोर्ट ने भगवान अयप्पा की पूजा-अर्चना करने का अधिकार सभी आयुवर्ग की महिलाओं को दे दिया है पर धार्मिक मान्यताओं की दलील देकर शीर्ष अदालत के फैसले का लगातार विरोध हो रहा है.

खबर है कि कभी वाम मोर्चा की साथी रही रिवोल्यूशनरी पार्टी के सांसद एन के प्रेमचन्द्रन एक निजी प्रस्ताव लाकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को  निष्प्रभावी करने के लिए तुरंत कानून बनाने की मांग करेगें क्योंकि सबरीमाला के लिए द्वार श्रृद्धालुओं के लिए खुलने का समय फिर आ रहा है.

केरल के सबसे बड़े अखबार मलयाली मनोरमा की मानें तो निजी बिल में यह दलील भी दी जा सकती है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से सबरीमाला में प्रवेश को लेकर एक बार फिर  उत्पात की स्थिति बन सकती है जो किसी के लिए ठीक नहीं होगा इसलिए टकराव टालना जरुरी है और संसद को इस मामले में तुरंत दखल देनी चाहिए.

उल्लेखनीय है कि रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी अब कांग्रेस की साथी है और ये निजी बिल उन गिने चुने बिलों में शामिल हो सकता है जिन्हें संसद में पारित किया गया हो क्योकि भाजपा और कांग्रेस दोनों की राय सबरीमाला को लेकर एक जैसी ही है और दोनों ही शीर्ष अदालत के रुख से संतुष्ट नहीं है.

दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट भी नागरिक अधिकारों का हवाला देकर दस से पचास साल तक की सभी महिलाओं को मंदिर में प्रवेश करने और पूजा करने का अधिकार देने के अपने रुख पर कायम है और उसके फैसले के खिलाफ पचास के करीब पुनर्विचार याचिकाएं उसके पास लम्बित हैं जिन पर उसने अभी ये भी नहीं बताया है कि वो उनकों कब सुनवाई के लिए लेगा.

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