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सम्पत्तियां जब्त करने का यूपी सरकार का फरमान गैरकानूनीः जस्टिस काटजू

सम्पत्तियां जब्त करने का यूपी सरकार का फरमान गैरकानूनीः जस्टिस काटजू

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस मार्कण्डेय काटजू ने अपनी एक फेसबुक पोस्ट में लिखा है कि प्रदर्शनकारियों की सम्पत्ति जब्त करना या उन पर जुर्माना लगाने का उत्तर प्रदेश सरकार का फैसला पूरी तरह गैर कानूनी है क्योंकि भारतीय दंड संहिता में इस तरह का कोई प्रावधान ही नहीं है जिसके तहत ये कार्रवाई की जा सके.

भारतीय दंड संहिता में उपद्रव करने के दोषी को दो साल तक जेल भेजने का प्रावधान है और इसके साथ ही उस पर आर्थिक दंड लगाया जा सकता है पर ये कार्रवाई अदालत के जरिए ही की जा सकती है और बिना सुनवाई किसी आरोपी की सम्पत्ति सील करने का अधिकार देश का कोई भी कानून नहीं देता.

अपनी पोस्ट में उन्होंने लिखा है कि मैं किसी प्रदर्शन के दौरान सार्जनिक सम्पत्ति को नुकसान पहुंचाने का समर्थन कतई नहीं करता पर ऐसा करने वालों को सजा कानून के मुताबिक ही दी जानी चाहिए न कि मनमाने तरीके से.

उल्लेखनीय है यूपी सरकार ने मुजफ्फरनगर में संशोधित नागरिकता कानून के विरोध में संघर्ष के दौरान तोड़फोड़ में मदद करने के आरोप में पचास के करीब दुकानों को सील करवा दिया है.

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज ने कहा कि अगर जर्मनी में हिटलर की तरह भारत में मुख्यमंत्रियों को अपने कानून बनाने और अमल करने की छूट दे दी गई तो समझ लिया जाना चाहिए कि देश में नाजीवाद की शुरुआत हो चुकी है.

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