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बेरोजगारी के आंकड़ों से खौफ में मोदी सरकार, लेबर ब्यूरो की रिपोर्ट  रोकी

बेरोजगारी के आंकड़ों से खौफ में मोदी सरकार, लेबर ब्यूरो की रिपोर्ट रोकी

बेरोजगारी के आंकड़ों से घबड़ाई मोदी सरकार ने जिस लेबर ब्यूरो से आंकड़े तैयार करवाकर माहौल को अपने पक्ष में करने की कोशिश की थी, अब लेबर ब्यूरों के आंकड़े तैयार होने पर उसने ही उन्हें दो महीने के लिए यानि चुनाव तक जारी होने से रोक दिया है.

इससे पहले नेशनल सैम्पल सर्वे संगठन ने देश में बेरोजगारी के आंकड़े जारी किए थे पर उसे मोदी सरकार ने खारिज करते हुए उसकी काट के लिए लेबर ब्यूरो को मुद्रा योजना से पैदा हुए रोजगार के आंकड़े तैयार करने को कहा था और नीति आयोग का पूरा दबाव था कि इसे फरवरी में तैयार कर लिया जाए ताकि इसे चुनाव के पहले मार्च में ही जारी किया जा सके.

लेकिन अब जब ये आंकड़े तैयार हुए तो इस कुछ तकनीकि खामियों के आधार पर सरकार ने दो महीने तक जारी होने से रोक दिया है ताकि कम से कम चुनाव में बेरोजगारी के खौफनाक साए से वो बची रह सके.

इस पर ट्वीट करके सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने तंज करते हुए लिखा है कि बीएसएनएल, स्टैच्यू ऑफ यूनिटी और नरेगा तीनों के कामगारों को वेतन नहीं मिला यानि जिनके पास काम है उन्हें भी वेतन नहीं मिल रहा है और 45 वर्षों में सबसे ज्यादा बेरोजगारी है क्योकि सारा धन तो प्रचार पर खर्च कर दिया गया इसलिए देश को अब ‘प्रचारमंत्री नहीं नया प्रधानमंत्री चाहिए.’

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