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..तो सरकार पहले क्यों कह रही थी कि एनपीआर से ही बनेगा एनआरसी

..तो सरकार पहले क्यों कह रही थी कि एनपीआर से ही बनेगा एनआरसी

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर अब भले ही ये दावा कर रहे हैं कि एनआरसी और एनपीआर यानि नेशनल पापुलेशन रजिस्टर में कोई सम्बन्ध नहीं है लेकिन यह भी तो सच्चाई है कि यही सरकार पहले कई मौकों पर संसद के भीतर और बाहर यह कह चुकी है कि एनआरपी से ही एनआरसी का रास्ता खुलेगा.

मीडिया रिपोर्टों की मानें तो मोदी सरकार ही एक दो बार नहीं कम से कम नौ बार संसद में पहले एनआरपी और एनआरसी को आपस से सम्बन्धित बताकर यह कह चुकी है कि एनआरपी  ही एनआरसी  का रास्ता साफ करेगा.

मोदी सरकार के पिछले कार्यकाल में आठ जुलाई 2014 को केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरेन रिजीजू ने राज्यसभा में कांग्रेस सांसद के सवाल पर बताया था कि  सरकार एनआरपी के जरिए भारतीय नागरिकों और बिना नागरिकता के किसी क्षेत्र विशेष में रह रहे लोगों का डाटा तैयार करेगी और बाद में इसका इस्तेमाल ही नेशनल रजिस्टर फार सिटिजनशिप को तैयार करने के लिए किया जाएगा.

लेकिन अब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मीडिया से बात करके दावा किया है कि नेशनल रजिस्टर फार सिटिजनशिप  और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर यानि एनपीआर में  कोई संबंध नहीं है और एनपीआर का डाटा का इस्तेमाल  एनआरसी के लिए नहीं किया जाएगा और इसका मकसद सिर्फ विकास योजनाओं को ढंग से बनाना है.

यह सही है कि पहली बार एनआरपी कांग्रेस सरकार ने 2010 में 2003 के  नागरिकता कानून  के तहत लागू किया था जिसमें  भारतीय होने के लिए माता पिता में से किसी एक का भारतीय होना जरुरी कर दिया गया था लेकिन तब एनआरपी के लिए जो कार्ड बांटे गए थे उनमें सिर्फ पंद्रह बिन्दुओं पर ही जानकारी मांगी जा रही थी लेकिन इस बार 21 बिन्दुओं पर लोगो को जवाब देना होगा जिसमें मां-बाप का जन्म स्थान और जन्म तारीख बताना भी शामिल है जिसे लेकर ही तमाम विपक्षी नेता और लोग चिन्ताएं जाहिर कर रहे हैं.

एआईएआईएम के असददुद्दीन ओवैसी और वाम दलो ने कहा है कि एनपीआर के जरिए एकत्र आंकड़ों की छटनी करके भारतीयों की पहचान की जा सकती है और भले ही इसमें अभी कोई दस्तावेज नहीं मांगे जा रहे हों पर किसी भी नागरिकता को संदिग्ध घोषित करने का अधिकार एक अफसर पर है और तब आपको जरूरी कागजात देने ही होंगे.

 

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