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बच्चों को अपराध से दूर रखना है तो उनके परिवारों की गरीबी मिटाएंः जस्टिस चन्द्रचूड़

बच्चों को अपराध से दूर रखना है तो उनके परिवारों की गरीबी मिटाएंः जस्टिस चन्द्रचूड़

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस डीवाई चन्द्रचूड़ ने कहा है कि बाल अपराध और गरीबी में गहरा रिश्ता है और आंकड़े इसके गवाह हैं इसलिए अगर इन पर रोक लगानी है तो बच्चों को गरीबी से बाहर निकालना होगा.

जस्टिस चन्द्रचूड़ ने  सुप्रीम कोर्ट द्वारा आयोजित किशोर न्यायालय परामर्श समारोह में बोलते हुए कहा कि सरकारी आंकड़े भी उनकी बात की तस्दीक करते हैं और देश के नीति निर्माताओं को इस ओर खास ध्यान देना चाहिए.

उन्होंंने कहा कि राष्ट्रीय अपराध ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं कि 2015 में बाल अपराधी के तौर पर पहचाने गए 42 फीसदी बच्चे ऐसे परिवारों से थे जिनकी आय ढाई हजार रुपए महीने से कम थी और इसी तरह 28 फीसदी बच्चे ऐसे परिवारों से जिनकी सालाना आय पचास हजार से कम थी जबकि उच्च वर्ग के सिर्फ दो फीसदी बच्चों ने अपराध की दुनिया में कदम रखा.

उन्होंने कहा कि सच्चाई तो यह भी है कि सरकारों को यह भी पता है कि बाल कानूनों की मंशा और उन्हें लागू करने के तौर तरीकों में इतना अंतर है कि उसका मकसद ही बिगड़ जाता है.

उन्होंने कहा कि बच्चों के साथ जहां करुणामयी रुख अपनाए जाने की जरुरत है तो वहीं कारपोरेट जगत को बाल अपराधियों को बेहतर जिन्दगी जीने लायक बनाने के लिए आगे आना चाहिए.

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