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आपातकाल का विरोध और इंदिरा-राजीव के हत्यारों के पैरोकार जेठमलानी नहीं रहे

आपातकाल का विरोध और इंदिरा-राजीव के हत्यारों के पैरोकार जेठमलानी नहीं रहे

देश में शायद सबसे लम्बे समय तक वकालत करने वाले सुप्रीम कोर्ट के वकील राम जेठमलानी का आज सुबह पौन  आठ बजे दिल्ली स्थित अपने आवास पर निधन हो गया.

कानून के इस शलाका पुरुष को देश का पहला क्रिमिनल लायर कहा जाता है जो न सिर्फ पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरागांधी द्वारा थोपी गई इमरजेंसी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में  मजबूती से खड़ा रहता है बल्कि जिसे अपनी व्यवसायिक क्षमता पर इतना भरोसा करता है कि प्रधानमंत्री रहते हुए मारे गए राजीव गांधी और उनकी मां इंदिरा गांधी के हत्यारों को बचाने के लिए भी कानूनी किला बनाने मे गुरेज नहीं करता.

हालांकि वकालत में एक के बाद एक मील का पत्थर बनने वाले मुकदमें लड़ने के बावजूद इन दोनों मुकदमों को लेकर जेठमलानी की काफी आलोचना भी हुई थी पर तब उन्होंन सार्वजनिक रूप से कहा था कि एक वकील के नाते अपराधी कोई भी हो और उसका अपराध कैसा भी हो, उसे कानूनी मदद देना उनका धर्म है ताकि उसे सजा मिले भी तो ये शिकायत करने का मौका न मिले कि उसे कानूनी तौर पर अपनी बचत करने का मौका नहीं मिला.

बहरहाल राम जेठमलानी देश में शायद सबसे कम उम्र में वकालत की पढ़ाई करने वाले युवक भी थे जिन्होंने 17 साल में वकालत की डिग्री ले ली थी पर सुप्रीम कोर्ट में वकालत शुरू करने के लिएए उन्हें तीन साल तक इंतजार करना पड़ा और वो देश में सबसे ज्यादा उम्र तक वकालत करने वाले वकील भी रहे.

बार काउंसिल के अध्यक्ष  रह चुके इस नामी वकील ने  कुछ साल पहले ही सक्रिय वकालत से खुद सन्यास ले लिया था पर कुछ साल पहले एक जज ने जब उनसे यूं ही पूछ लिया था आप रिटायर कब होंगे तो उन्होंने तपाक से जवाब दिया था कि आप यह क्यों नहीं पूछते की आप मरेंगे कब.

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