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ट्रेने बनेंगी हवाई-जहाज यानि अमीरों और गरीबों के लिए अलग अलग ट्रेनें

ट्रेने बनेंगी हवाई-जहाज यानि अमीरों और गरीबों के लिए अलग अलग ट्रेनें

मोदी सरकार ट्रेनों के निजीकरण के साथ ही उन्हें जिस तरह हवाई जहाज की तरह चलाने पर उतारू है उससे ये भी साफ है कि कभी देश के गरीब-गुरबों के लिए समर्पित रहने वाली भारतीय रेल अब उनसे दूर भी हो रही है और उसे उनकी कोई खास फिक्र भी नहीं है.

वैसे भी भारतीय रेल जिस रेलवे एक्ट के तहत संचालित होती है उसमें यात्रियों से लिया जाना वाला किराया तय करने का अधिकार सिर्फ सरकार के पास है लेकिन मौजूदा शासन इसे खुद अपनी मर्जी से निजी कम्पनियों को सौंप रहा है.

देश की पहली निजी ट्रेन तेजस जिसे लखनऊ और दिल्ली के बीच चलाया जा रहा है,उसका किराया पहली बार सरकार ने खुद तय करने की बजाए उसे चलाने वाली निजी कम्पनी को सौंप दिया है और यही वजह है कि इस ट्रेेन का किराया इस रूट पर चलन वाली शताब्दी से भी ज्यादा है.

यह ट्रेन लखनऊ और दिल्ली के बीच की 511 किमी की दूरी का किराया एक्जीक्यूटिव क्लास के लिए जीएसटी समेत रुपए 2450 लेती है जबकि एसी चेयरकार का किराया 1565 रुपए है जबकि अब तक सबसे मंहगे किराए वाली शताब्दी  का किराया अभी भी क्रमशः रुपए 1855 और रुपए 1165 ही है.

इसे लेकर जानकार अब यह सवाल उठाने लगे हैं कि किसी ट्रेन का उस रूट पर सबसे मंहगा किराया कोई निजी कम्पनी कैस तय कर सकती है जबकि संसद से पारित कानून के तहत तो ये अधिकार सिर्फ केंद्र सरकार के पास है.

यह सवाल ज्यादा बड़ा इसलिए भी हो जाता है क्योंकि सरकार अब कम से कम डेढ़ सौ ट्रेनें और पचास स्टेशनों को तेजस की तर्ज पर निजी क्षेत्र के हवाले करने का इरादा घोषित कर चुकी है.

दरअसल सरकार अब इस सोच पर काम कर रही है कि जिस तरह हवाई जहाज का किराया उसकी कम्पनी तय करती है और उसी पर अपने संचालन को फायदे या नुकसान में करने की सारी जिम्मेदारी और जवाबदेही होती है उसी तरह निजी क्षेत्र की ट्रेनों को भी किराया तय करने की छूट दे दी जाए.

इसमेंं कोई दो राय नहीं कि देश की पहली निजी ट्रेन तेजस मेंं तमाम सुविधाएं ऐसी हैं जिनकी अभी तक रेलवे के सफर में कल्पना नहीं की जाती थी साथ ही यात्रियों का स्वागत और सेवा करने के लिए एयर हास्टेस की तरह लड़कियां भी मौजूद हैं पर इन मंहगी ट्रेनों में गरीबी की रेखा से नीचे और निचली आय वाली देश की आधी से ज्यादा आबादी किस तरह सफर करने का सपना देख सकती है ये जरुर सोचने वाली बात है … यानि अब देश में दो तरह की ट्रेनों के लिए जगह साफ हो गई है पहली अमीर और खाते पीते घरों के लोगों के लिए और दूसरी देश के गरीब तबके के लिए.

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