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परवेज मुशर्रफ को फांसी दिया जाना  पाक सेना  को नामंजूर

परवेज मुशर्रफ को फांसी दिया जाना पाक सेना को नामंजूर

गद्दारी के आरोप में विशेष अदालत से सैनिक तानाशाह और पूर्व राष्ट्रपति  परवेज मुशर्रफ को मौत की सजा सुनाए जाने के खिलाफ पाकिस्तान सेना खुलकर सामने आ गई है और उसके बयानों से साफ है कि यह फांसी उसे मंजूर नहीं है.

उल्लेखनीय है कि इस्लामाबाद स्थित विशेष अदालत की तीन सदस्यीय पीठ 2-1 के बहुमत से  देश के सैनिक तानाशाह को सजाए मौत की  दे दी है और इस तरह परले दर्जे की गद्दारी करने के आरोप मे मौत की सजा पाने वाले वे इस देश के पहले सैन्य प्रमुख और दूसरे पूर्व राष्ट्रपति हैं.

इस सजा के ऐलान के तुरंत बाद पाकिस्तान सेना के आला अफसरों की एक आपात बैठक हुई जिसके बाद पाक सेना के मेजर जनरल और  इंटर सर्विस पब्लिक रिलेशन्स के महानिदेशक आसिफ गफूर ने बाकायदा एक बयान जारी करके कहा कि जो शख्स सेना का प्रमुख रहा हो, ज्वाइंट सर्विसेज का चीफ रहा हो और चालीस साल तक जिसने देश की सेवा की हो और कई लड़ाइयां खुद लड़ी हों वो कभी गद्दार हो ही नहीं सकता.

उन्होंने सेना की ओर से एक पत्र भी सोशल मीडिया में ट्विटर पर शेयर किया है जिसमें कहा गया है कि सेना को उम्मीद है कि अदालत आगे चलकर निष्पक्ष फैसले करेंगी.

उल्लेखनीय है कि मुशर्रफ को कारगिल युद्द का जनक माना जाता है जो उन्होंने उस समय नियोजित किया जब उस समय के भारत के प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी दोस्ती का हाथ बढ़ाकर पाक तक बस से गए थे और आगरा में मुशर्रफ की अगवानी कर रहे थे.

बहरहाल मुशर्रफ इस समय दुबई में रहकर इलाज करा रहे हैं और ये साफ है कि उनकी इस सजा को लेकर पाक सेना  न्याय पालिका  से दो दो हाथ करने को तैयार है.

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