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बाबर के साथ ही कहीं भारत के इतिहास से नफरत न करने लगे अति हिन्दूवादी

बाबर के साथ ही कहीं भारत के इतिहास से नफरत न करने लगे अति हिन्दूवादी

देश के अति हिन्दूवादी अपने जुनून में सड़कों इमारतों समेत हर उस स्थान का नाम बदल देना चाहते हैं जो बाबर या देश के मुस्लिम शासकों के नाम पर है पर उनके पास आज भी वह तरीका नहीं कि भारत के इतिहास के उस हिस्से को वो कैसे मिटा दें जो इन मुस्लिम शासकों के नाम पर इतिहास में दर्ज है.

दरअसल अभी तक तो इंसान वह हुनर हासिल नहीं कर पाया है जब वो भूतकाल में जाकर घट चुके इतिहास को बदल सके और शायद यही वजह है कि जर्मनी जैसा देश जब अपने क्रूर शासक हिटलर  को खुद से अलग नही कर पाया तो उसने इस सोच के साथ जीना सीख लिया कि भविष्य में कोई हिटलर कम से कम उसके यहां तो पैदा न हो जिससे पूरी दुनिया नफरत करे.

लेकिन भारत में स्थिति जुदा है क्योंकि यहां कभी सरकार पुराना इतिहास बदलने की कोशिश में कभी मुगलों के नाम  देकर सहेजी गई यादों को नाम बदल कर बदलने की कोशिश करती है तो कभी हिन्दू सेना जेैसे संगठन के लोग दिल्ली की बाबर रोड के पत्थर पर लिखे बाबर के नाम पर कालिख पोत कर सोचते हैं कि उन्होंने इतिहास बदल दिया.

बहरहाल दिल्ली में हिन्दू सेना के कुछ युवकों ने दिल्ली की बाबर रोड के पत्थर पर कालिख पोतकर केंद्र सरकार से अपील की है कि वो इस रोड का नाम राम, कृष्ण या देश के दूसरे महापुरुषों के नाम पर रखें ताकि अत्याचारी बाबर का कहीं इस देश में निशान  न बचे.

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