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आखिरकार उड़ीसा  ने छीन लिया बंगाल से रसगुल्ला

आखिरकार उड़ीसा ने छीन लिया बंगाल से रसगुल्ला

रसगुल्ला के मालिकाना हक को लेकर दो साल से भी ज्यादा समय तक चली कानूनी  लड़ाई का फैसला आखिरकार पश्चिमी बंगाल नहीं बल्कि उड़ीसा के हक में आया है.

वैसे तो रसगुल्ला पूरे देश का है पर पश्चिमी बंगाल और उड़ीसा पिछले दो सालो से इस बात पर भिड़े पड़े थे कि रसगुल्ला ने जन्म किस राज्य में लिया और उसके बनने में किस राज्य की संस्कृति का योगदान है.

यह लड़ाई शुरुआत में पश्चिमी बंगाल इस तर्क के साथ जीत गया था कि रसोगुल्ला तो उसकी सभ्यता संस्कृति में रच बस कर ही बड़ा हुआ है और खाद्य पकवानों पर राज्य के व्यंजन की मुहर लगाने वाले और चेन्नई के जीआई कार्यालय ने उसके दावे को स्वीकार  करते हुए उसे 14 नवम्बर 2017 को जीआई टैग यानि जियोग्राफिकल इंडीकेशन रजिस्ट्री  भी दे दी पर यह भला उड़ीसा को कहां मंजूर होता.

भले ही रसगुल्ला को अपना बनाने की खुशी पश्चिमी बंगाल ने किसी लड़ाई में फतह मिलने की तर्ज पर मनाई थी और खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ट्वीट करके  बंगाल के रसगुल्ले को जीआई टैग मिलने को सबसे मीठी खबर कहा था पर उसी समय उड़ीसा ने भी ऐलान कर दिया था कि वो रसगुल्ले पर अपना दावा कतई नहीं छोड़ेगा क्योकिंं यह उसके लिए भगवान जगन्नाथ की संस्कृति से जुड़ा है.

आखिरकार फिर शुरु हुई उड़ीसा और  बंगाल के बीच की कानूनी लड़ाई का अंतिम फैसला 29 जुलाई 2019 को आया जब चेन्नई के उसी कार्यालय ने रसगुल्ले पर उड़ीसा के दावे को मानते हुए जीआई का तमगा बंगाल से छीनकर उसे दे दिया.

 

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