Share
अब एसपीजी के तीन हजार कमांडो के जिम्मे सिर्फ पीएम मोदी की सुरक्षा

अब एसपीजी के तीन हजार कमांडो के जिम्मे सिर्फ पीएम मोदी की सुरक्षा

एसपीजी के तीन हजार कमांडो अब मिलकर अकेले प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की सुरक्षा करेंगे क्योंकि राजीव गांधी परिवार से एसपीजी सुरक्षा वापस लेने के बाद अब ऐसा कोई ऐसा नेता नहीं है जिसकी सुरक्षा की चिन्ता एसपीजी को करनी पड़े.

उल्लेखनीय है कि पूर्व प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह को एसपीजी सुरक्षा इसी साल अगस्त में वापस लिए जाने के बाद केवल चार लोग ही ऐसे थो जिन्हें एसपीजी सुरक्षा मिली हुई थी इनमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, कांग्रेस नेता और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पत्नी सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा शामिल थे.

राजीव परिवार के तीनों सदस्यों एसपीजी सुरक्षा 1991 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के आत्मघाती हमले में मारे जाने के तुरंत बाद तत्कालीन नरसिम्हा राव सरकार ने एसपीजी कानून में यह बदलाव करके दिया था कि पूर्व प्रधानमंत्रियों के परिजनों को दस साल या जब तक सुरक्षा एजेंसियां खतरा महसूस करें तब तक एसपीजी सुरक्षा दी जाएगी.

1988 में बनी एसपीजी के जिम्मे पहले सभी पूर्व प्रधानमंत्रियों को  सुरक्षा देने की जिम्मेदारी थी लेकिन जब 1989 में चुनाव हारने के बाद प्रधानमंत्री बने विश्वनाथ प्रताप सिंह ने राजीव गांधी से यह सुरक्षा छीनकर उन्हें जेड प्लस  यानि एनएसजी  सुरक्षा दे दी थी जो बड़ी गलती साबित हुई और राजीव गांधी एक आतंकवादी हमले में मारे गए और इसके तुरंत बाद ही  राजीव परिवार को जो एसपीजी सुरक्षा दी वो अब तक चली आ रही थी.

लेकिन अब मोदी सरकार ने इसी शीत कालीन सत्र में सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका वाड्रा सेे एसपीजी कवर छीनकर उन्हें जेड प्लस सुरक्षा प्राप्त  तीस अन्य नेताओं की सूची में डाल दिया है.

कांग्रेस जाहिर है कि इस फैसले का भरपूर विरोध करेगी क्योंकि एसपीजी सुरक्षा छिनने के बाद सोनिया गांधी से उनका मौजूदा आवास दस जनपथ भी छीना  जा सकता जो उनके पास 1991 से है और वो इसमें तब  भी रह रहीं थीं जब उन्होंने राजनीति में प्रवेश भी नहीं किया था.

इसी तरह सारे सांसदों को हर चुनाव के बाद दिल्ली में मिलने वाला सरकारी आवास बदलता रहता है पर राहुल गांधी का आवास अब तक कभी इसलिए नहीं बदला क्योंकि उन्हें एसपीजी सुरक्षा मिली हुई थी लेकिन अब उन्हें भी सामान्य सांसदों की तरह छोटा आवास मिल सकता है.

इसी तरह प्रियंका वाड्रा भले ही अपने आवास का अब किराया देती हों पर अगर वो सांसद नहीं बनतीं तो हो सकता है सरकार उन्हें दिल्ली में घर दे ही नहीं.

जिस तरह एसपीजी की लम्बी चौड़ा लाव-लश्कर  के जिम्मे अब सिर्फ मौजूदा प्रधानमंत्री की सुरक्षा की जिम्मेदारी है उससे तो यही लगता है कि अगर एसपीजी का नाम ही बदलकर उसे राष्ट्रपति की सुरक्षा की तरह प्रधानमंत्री सुरक्षा गार्ड कर दिया जाए तो भी गलत नहीं होगा.

उल्लेखनीय है कि एसपीजी सुरक्षा प्राप्त व्यक्ति बुलेट प्रूफ कार में चलता है और  उसके आसपास कई फटक भी नहीं सकता है जबकि जेड प्लस सुरक्षा में 55 सुरक्षा बलों के जवान होतें हैं जिनमें कम से कम दस एनएसजी कमांडो होते हैं.

Spread the love

Leave a Comment