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यूपी पुलिस अब अपराधियों की बजाए पत्रकारों को सबक सिखाने में जुटी

यूपी पुलिस अब अपराधियों की बजाए पत्रकारों को सबक सिखाने में जुटी

यूपी पुलिस पिछले एक महीने में ही सिर्फ खबर छापने के आधार पर सात पत्रकारों के खिलाफ मुकदमें दर्ज कर चुकी है और पुलिस की छवि खराब करने के कथित आरोप मे एक पत्रकार को गिरफ्तार भी कर चुकी है.

पुलिस की इन कार्रवाइयों का पहला निशाना भले ही मिड डे मील में बच्चों को नमक-रोटी दिए जाने की खबर और वीडियो बनाने वाला पत्रकार आया हो पर अब तो इसी तरह की एक अन्य घटना में आजमगढ़ के एक प्राइमरी स्कूल में बच्चोंं से झाड़ू लगवाए जाने का वीडियो बनानेे वाले पत्रकार सुधीर सिंह को सरकारी काम में बाधा डालने, गलत प्रचार करने और कथित रूप से वसूली के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है.

इस गिरफ्तारी के खिलाफ मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पत्रकारों नेे वहां के जिलाधिकारी को पुलिस के इस तौर तरीके से अवगत कराया जिसपर उन्होंनेे जांच कराने और पत्रकारों के साथ अन्याय न होने देने की बात तो कही है पर शायद सरकारी तंत्र अपने तौर तरीके से और अपना समय लेकर काम करता है, इसलिए पत्रकारों के पास इंतजार करने के अलावा कोई चारा नहीं है.

इल पत्रकार के खिलाफ छह सितंबर को दर्ज प्राथमिकी संख्या 237  में आरोप लगाया गया है कि यह पत्रकार अक्सर स्कूल आता जाता थ और पुरुष एवं महिला शिक्षकों से  बदसुलूकी करके अपना अखबार बिकवाने पर दबाव बना रहा था साथ ही उसने खुद छात्रों को स्कूल में झाड़ू लगाने को कहा ताकि फोटो खींची जा सके.

इस बीच इसी पत्रकार ने स्थानीय इंस्पेक्टर के खिलाफ बिना नम्बर वाली लक्जरी कार रखने की फोटो ट्विटर पर छापी तो पुलिस ने जवाबी ट्वीट किया कि यह फोटो रजिस्ट्रेशन से पहले का है और अपनी बात के सुबूत के तौर पर उसने नम्बर प्लेट के साथ गाड़ी की फोटो ट्वीट की पर थोड़ी ही देर में एक राष्ट्रीय समाचार एजेंसी के लिए काम करनेेे वाले इस पत्रकार ने ट्वीट करके खुलासा कर दिया कि चार पहिया पर जिस नम्बर को पुलिस प्लेट पर दिखा रही है वो तो एक मोटर साइकिल का है.

अब इतना बर्दाश्त करने का तो यूपी पुलिस के पास हाजमा ही नहीं है सो पुलिस अपने तौर तरीकों से पत्रकार को सबक सिखाने में लगी है.

अब इस आरोप की सच्चाई तो जांच में ही सामने आएगी लेकिन इसके बाद एक और घटना हुई जिसमें एक साथ पांच पत्रकारों को नामजद कर दिया गया है.

इस घटना में आजमगढ़ पुलिस ने एक दलित महिला द्वारा अपना घर इस आरोप में बेचने का विज्ञापन करने का ठीकरा जिले के पांच पत्रकारों पर फोड़ दिया है कि दबंग उसे सरकारी नल से पानी नहीं भरने दे रहे.

दरअसल कथित रुप से इस महिला की बेटी को पानी भरने से रोके जाने की शिकायत मिलने पर स्थानीय पुलिस ने दोनों पक्षों में समझौता करा दिया था पर इसी महिला ने कुछ दिनों बाद सीधे अपना मकान बेचने की सूचना दबंगों पर यही आरोप लगाते हुए घर पर चस्पा कर दी जिसे पुलिस ने अपनी छवि खराब करने की साजिश माना और पांच पत्रकारों की घराबंदी कर ली.

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