यूपी में है सबसे पुराने पेड़ों मे शामिल धरती का इकलौता असली परिजात वृक्ष

यूपी की राजधानी लखनऊ से लगे बाराबंकी जिले में दुनिया के सबसे पुराने पेड़ों में शामिल धरती का असली परिजात पेड़ है जो कभी स्वर्ग में इंद्र के पास हुआ करता था।

परिजात के नाम से धरती पर मौजूद तमाम दूसरे पेड़ों से यह बिल्कुल अलग है क्योंकि इसमें ना फल होते हैं न बीज और ना ही इसकी कलम लगाई जा सकती है इसलिए इस जैसा दूसरा पेड़ धरती पर नहीं है।

यह पेड़ कोई छह हजार साल पुराना बताया जाता है जिसे भगवान कृष्ण के कहने पर अर्जुन ने इसे यहां लगाया था ताकि उनकी माता कुंती को भगवान शिव की पूजा के लिए रोज फूल मिल सकें।

इस पेड़ के पास ही कुंतेश्वर महादेव मंदिर है जहां कहा जाता है कि आज भी माता कुंती सबसे पहले शिवलिंग पर पुष्प चढ़ाती हैं और जब भी मन्दिर सुबह खुलता है कुंती के चढ़ाए फूल शिव लिंग पर दिखाई देते हैं।

इस अनूठे पेड़ की खास बात यह भी है कि जून के बाद छह महीने तक यह हरा भरा रहताभाई जबकि बाकी के छह महीने एकदम सूखा जाता है पर लोग मानते हैं कि इस पेड़ से जो भी मांगो वो मिलता है।

समुद्र मंथन से निकला यह पेड़ जो कभी इंद्र के स्वर्ग में था अब धरती पर पचास मीटर दायरे में फैल चुका है पर अब इसे चारों तरफ से घेर दिया गया है ताकि कोई इसकी शाखाएं तोड़कर घर ना ले जा सके।

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