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मायावती का हलफनामाः मेरी और हाथियों की मूर्तियां जनता की इच्छा का नतीजा

मायावती का हलफनामाः मेरी और हाथियों की मूर्तियां जनता की इच्छा का नतीजा

बसपा सुप्रीमो मायावती ने सुप्रीम कोर्ट मेंं हलफनामा दाखिल करके कहा है कि जिस तरह जनता की इच्छाओं का सम्मान करते हुए दूसरे दल अपने नेताओं की मूर्तियां लगाते हैं उसी तरह उनकी मान्यवर कांशीराम के साथ लगी मूर्तियां भी जनता की इच्छा के तहत ही लगाई गई हैं.

मायावती का कहना है कि विधायक और दबे कुचले तबके के लोग चाहते थे कि दलित संघर्ष के प्रतीक के तौर परप उनकी मूर्तियां भी मान्यवर कांशीराम के साथ लगाई जाएं जिनका सम्मान करते हुए पूरी प्रक्रिया का पालन करके ये मूर्तियां बनवाई और लगवाई गई हैं.

उन्होंने हाथियों की मूर्तियोंं पर भी अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि हाथी सिर्फ बसपा के चुनाव चिन्ह नहीं हैं बल्कि ये हमारी संस्कृति और शुभ चिन्हों के रूप में पारम्परिक कलाकृतियों के भी प्रतीक हैं और इसी भावना से लगाए गए हैं.

इन मूर्तियों को लगाने पर कितना धन खर्च हुआ इसका जवाब देते हुए मायावती ने कहा है कि जो धनराशि इन पर खर्च की गई है वो विधायिका से बाकायदा पारित कराकर खर्च की गई है और उस पर सवाल उठाने का अदालत को अधिकार नहीं है.

उल्लेखनीय है मायावती ने यह हलफनामा सुप्रीम कोर्ट में 2009 में दायर रविकांत और अन्य की याचिका पर दिए गए उस फैसले पर अपना पक्ष रखते हुए दिया है जिसमें मायावती से मूर्तियों पर आए खर्त को सरकारी खजाने में दर्ज कराने के लिए कहा गया है.

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