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मच्छर सूंघकर पता लगा लेते हैं कहां है उनका खाना..

नवीनतम शोध बताता है कि मच्छरों में सूंघने की जबरदस्त ताकत होती है और पहले वो उसांसों से निकली कार्बन डाई आक्साइड सूंघकर ये पता लगाते हैं कि मनुष्य कहां बैठा है और फिर हमारा पसीना सूंघकर यह तय कर लेते हैं कि उन्हें कहां से खून पीने के लिए अपनी सूड़ घुसेड़नी है.

रिसर्च जरनल करंट बोयोलोजी में प्रकाशित एक शोध बताता है कि पहले मादा मच्छर तीस फीट दूर तक से अपने रिसेप्टरों से सूंघकर यह पता लेती है कि मनुष्य कहां पर है और फिर वहां पहुंचकर इसके पसीने और शरीर से निकलने वाले लैक्टिक एसिड के साथ साथ हमारे शरीर का तापमान उन्हें बता देता है कि वो सही जगह पर है और हमारी हर हरकत से यही तत्व उसे यह भी आगाह करते हैं कि कब सतर्कता बरतते हुए उड़ जाना है.

मच्छर के पैरों में वो रिसेप्टर पाए जाते हैं जो इन सब कामों में उसकी मदद करते हैं और फ्लोरिडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के न्यूरोबायोलोजिस्ट के अनुसार अभी कुछ और रसायनों की तलाश करना बाकी है जो मच्छरों को शिकार तलाशने में मदद करते हैं.

उल्लेखनीय है कि हर साल कोई सवा सात लाख लोग सिर्फ मच्छरों के काटने से होने वाली बीमारियों का शिकार बनते हैं

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