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तीन तलाक और नागरिकता बिल को कानून बना पाने में मोदी सरकार फेल

तीन तलाक और नागरिकता बिल को कानून बना पाने में मोदी सरकार फेल

राज्यसभा की कार्रवाई  आज अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने से मोदी सरकार के तीन तलाक और नागरिकता संशोधन जैसे कई महत्वपूर्ण विधेयकों ने कानूनी जामा पहनने से पहले ही दम तोड़ दिया  है.

विपक्ष के हंगामों और सदन के सुचारु संचालन में असफल साबित हुई मोदी सरकार ने राज्यसभा के अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने से पहले आज अंतरिम बजट और 2019-20 का वित्त विधेयक जरूर बिना बहस के पारित करा लिया पर अपने कुछ खास विधेयकों को लोकसभा में पारित करा लेने के बाद भी वह राज्यसभा से जिन्दा निकाल सकने में असफल रही.

नियमतः अगर कोई विधेयक राज्यसभा से पारित होकर लोकसभा में आता है तो वह लोकसभा का कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी खत्म नहीं होता पर अगर कोई विधेयक लोकसभा से पारित होकर राज्य सभा में आता है तो वह लोकसभा का कार्यकाल समाप्त होने तक अगर राज्यसभा में पारित नहीं होता तो वह लैप्स कर जाता है.

नागरिकता संशोधन विधेयक मोदी सरकार ने लोकसभा में तो पारित करा लिया था पर वह अभी राज्यसभा में लम्बित है जून में इस 16वीं लोकसभा का कार्यकाल समाप्त होने के साथ ही लैप्स हो जाएगा.

इस नागरिकता संशोधन विधेयक के जरिए मोदी सरकार पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांगलादेश से आए गैर मुस्लिमों को 12 साल की निवास अवधि की बजाए सात साल में ही भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान करने जा रही थी जो जिसका उसे बंगाल के चुनावों मेंं खास तौर पर फायदा मिल सकता था.

इसी तरह मुस्लिम महिलाओं के लिए सुधारवादी तीन तलाक बिल में एक बार में तीन बार बोलकर तलाक देने की प्रथा को गैर कानूनी और ऐसा करने वाले पुरुषों के लिए जेल का प्रावधान करने वाले तीन तलाक बिल को भी सरकार ने दिसम्बर में लोकसभा से पारित करा लिया था पर आखिर तक वो इसे राज्यसभा से मंजूर नहीं करा सकी.

हालांकि ये कानून अध्यादेश के सहारे लागू किया जा चुका है और सरकार को इस लागू रखने के लिए एक बार फिर अध्यादेश ही जारी करना पड़ेगा.

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