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मोदी सरकार का दावा, एक्सचेंज रेट बढ़ने से बढ़े राफेल के दाम

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मोदी सरकार ने आज राफेल सौदे से जुड़े दस्तावेज इस सौदे को कोर्ट में चुनौती देने वाले पक्षकारों को सौंप दिए.

उधर खबर है कि सरकार ने बंद लिफाफे में राफेल की कीमत का ब्योरा भी सुप्रीम कोर्ट को सौंपा है पर इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है.

सरकार ने आज 12 नवम्बर को सुप्रीम कोर्ट में राफेल पर जो हलफनामा दाखिल किया है उसमें कहा गया है कि राफेल खरीदने की बातचीत तो पिछली सरकार ने 2012 में शुरु की पर यह बातचीत इतनी लम्बी चलती रही कि उतने ही समय में हमारे पड़ोसियों ने चार सौ से ज्यादा फाइटर जहाज खरीद लिए.

सरकारी दस्तावेजों के अनुसार राफेल विमानों की खरीद में रक्षा खरीद प्रक्रिया-2013 में निर्धारित प्रक्रिया का पूरी तरह पालन किया गया है और इसके लिए उसने सालभर में सत्तर से ज्यादा बैठकें की जिसकी पूरी कार्यवाही मौजूद है.

हलफनामे में दोहराया गया है कि फ्रांस की दासो एविएशन और हिन्दुस्तान एयरोनाटिक्स के बीच  कुछ मसलों पर इतने मतभेद थे कि पिछली  सरकार इस समझौते पर आगे नहीं बढ़ सकी  थी.

सरकार का कहना है कि इसके बाद भी देश में राफेल के लिए भारतीय पार्टनर अनिल अम्बानी का चयन करना और उनके साथ  एकनई कम्पनी बनाने  में सरकार की कोई भूमिका नहीं है और यह पूरी तरह फ्रांस  की जहाज कम्पनी का व्यापारिक फैसला है.

मोदी सरकार के अनुसार जून 2015 में वायुसेना की तातकालिक जरूरतो को तुरंत पूरा करने के लिहाज से 126 विमान खरीदने का इरादा छोड़कर केवल 36 विमान खरीदने का फैसला किया गया ताकि वायुसेना में कम से कम दो स्क्वड्रन तो तुरंत बनाई जा सकें.

उल्लेखनीय है कि कांग्रेस  अध्यक्ष राहुल गांधी राफेल सौदे में सीधे प्रधानमंत्री नरेन्द्र  मोदी पर अनिल अम्बानी के साथ मिलकर दलाली खाने का आरोप लगा रहे हैं और उनका कहना है कि कांग्रेस ने जिस जहाज को कुल 526 करोड़ में खरीद रही थी उसे  ही मोदी सरकार 1600 करोड़ रुपए में खरीद रही है और इस घोटाले में आठ सौ करोड़ से ज्यादा की रकम का भुगतान रिलायंस की मार्फत किया भी जा चुका है.

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