Share
एनआरसी और डिटेंशन सेंटरों पर इतना गलतबयानी कैसे कर गए पीएम मोदी ?

एनआरसी और डिटेंशन सेंटरों पर इतना गलतबयानी कैसे कर गए पीएम मोदी ?

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दिल्ली के रामलीला मैदान में हजारों की भीड़ के सामने खुलकर दावा तो कर दिया कि उनकी सरकार ने न तो एनआरसी पर कोई बात की है और न ही देश में कहीं भी कोई डिटेंशन सेंटर बनाया गया है  और न ही इसकी योजना है पर सरकार के अपने कागजात. मौजूदा सरकार के मंत्रियों के बयान और यहां तक कि लोकसभा की कार्रवाई तक बताती है कि पीएम ने इस बार देश की जनता से सफेद झूठ है.

कांग्रेस ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से पीएम के इस दावे पर आश्चर्य जताते हुए लिखा है कि ‘क्या पीएम यह कैसे भूल गए कि उनके झूठ की पड़ताल  आम भारतीय सिर्फ गूगल पर मामूली सर्च  करके  पता कर सकता है और तब उसे पता चल जाएगा कि वास्तव में देश में न सिर्फ डिटेंशन सेंटर (बंदी गृह)   हैं  बल्कि इस सरकार की योजना तो उन्हें लगातार बढ़ाने की है. ’

कांग्रेस ने अपने ट्वीट में अख़बारों की खबरों को भी पेश किया है जिसमें से एक खबर केंद्रीय गृह मंत्री नित्यानंद राय की भी है जिसमें एक में वे मान रहे हैं कि असम के ऐसे सेंटर में  28 लोगों की मौत हुई है.

कांग्रेस ने अपने ट्वीट में अख़बारों की रिपोर्ट को भी अटैच किया है। इसमें एक रिपोर्ट में केंद्रीय गृह मंत्री नित्यानंद राय कह रहे हैं कि असम के बंदी गृह में 28 अवैध शरणार्थियों की मौत हुई है। रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ अफ़वाह फैलाने का आरोप लगाते हुए जमकर हमला बोला था।

उल्लेखनीय है कि पीएम ने मोदी ने रामलीला मैदान में कहा है कि   ‘…. देश के मुसलमानों को ना तो डिटेंशन सेंटर में भेजा जा रहा है और ना  ही देश में  कोई डिटेंशन सेंटर है… ये सफेद झूठ है, अफवाह है और विपक्ष का  नापाक खेल है…. और  पिछले पांच सालों की उनकी सरकार में एनआरसी (राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर) पर कोई चर्चा नहीं हुई है.

उन्होंने साफ कहा कि 2014 से आज तक  कहीं पर भी एनआरसी शब्द पर कोई चर्चा नहीं हुई है. कोई बात नहीं हुई है लेकिनकेंद्रीय गृह  राज्य मंत्री जी. किशन रेड्डी ने दो जुलाई 2019 को कांग्रेस नेता शशि थरूर के सवाल के जवाब में लोकसभा में बताया था कि असम में इस समय असम के गोलपाड़ा, कोकराझार, सिल्चर, डिब्रूगढ़, जोरहाट और तेजपुर में कुल छह डिटेंशन सेंटर हैं  जिनमें महिला एवं पुरुष के अलावा बच्चों को भी बंदी बनाकर रखा जाता है और  25 जून 2019 तक कुल 1133 लोगों को रखा गया है, जिसमें से 769 लोग पिछले तीन सालों से रह रहे हैं.

 

रेड्डी ने यह भी बताया था कि इन डिटेंशन सेंटर्स में 335 लोगों को पिछले तीन साल से भी ज्यादा समय से रखा गया है और 1985 से लेकर 28 फरवरी 2019 तक में असम में फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल द्वारा 63,959 लोगों को विदेशी घोषित किया गया है.मंत्री का दावा था कि इन सेंटरों में रह रहे सभी बंदियों को डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विस अथॉरिटी द्वारा मुफ्त में कानून सहायता दी जा रही है

इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नौ अगस्त 2016 को भी लोकसभा में एक लिखित उत्तर में बताया था कि तीन अगस्त 2016 तक   डिटेंशन सेंटर्स में कुल 28 बच्चों को रखा गया था.

केंद्र सरकार तो राज्यसभा में  24 जुलाई 2019 को यह भी स्वीकार कर चुकी है कि  विभिन्न राज्यों  और केंद्र शासित प्रदेशों में डिटेंशन सेंटर बनाने के लिए सरकार ने एक ‘मॉडल डिटेंशन सेंटर मैनुअल’ तैयार कर लिया है और इसे नौ जनवरी 2019 को इसे सभी राज्यों को भेज दिया गया है.

पीएम भले एनआरसी  को खारिज करें पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह लगातार अपनी चुनावी रैलियों से लेकर संसद तक में  पूरे देश में चरणबद्ध तरीके से एनआरसी लागू करने की बात कहत रहें हैं और 2019 के लोकसभा चुनाव में तो ये बात  भाजपा  घोषणापत्र में भी शामिल थी.

 

Spread the love

Leave a Comment