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दवा कम्पनियों के साथ धंधेबाजी में शामिल हैं ज्यादातर डाक्टर

दवा कम्पनियों के साथ धंधेबाजी में शामिल हैं ज्यादातर डाक्टर

डाक्टरों और दवा कम्पनियों पर नजर रखने वाली दिल्ली की एक संस्था आल इंडिया ड्रग एक्शन नेटवर्क ने केंद्र सरकार को कई मामलों के बाकायदा सुबूत सौंपकर मांग की है कि दवा कम्पनियों के साथ मिलकर इलाज से कहीं ज्यादा धंधेबाजी करने वाले डाक्टरों और दवा कम्पिनयों पर शीघ्र नकेल कसा जाना जरूरी है ताकि डाक्टरी के पेशे को बदनाम होने से बचाया जा सके.

इस बारे में विशाखापत्तनम से शिकायत करने वाले एक शख्स की पहल पर संस्था ने कई बड़ी बहुराष्ट्रीय कम्पनियों और उनकी भारतीय प्रतिनिधि दवा कम्पनियों के काम काज को खंगाला तो पता चला है कि इस धंधे में बहुत कुछ काला है.

संस्था ने जो सुबूत केंद्र सरकार को सौंपे हैं उसमें बड़ी कम्पनियों से सौदा करके उनकी दवाओ का बाजार सृजित करने के साथ साथ बड़े बड़े डाक्टर भी कम्पनियों से कभी सेमिनार के नाम पर तो कभी विदेश घूमने के नाम पर गलत तरीके से नकद या सुविधाएं लेते है जो मेडिकल एथिक्स के बिल्कुल खिलाफ है पर यह ट्रेंड कम होने की बजाए दिनों दिन बढ़ता ही जा रहा है.

बिजनेस टुडे  में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार इस संस्था ने डाक्टरों के साथ साथ दवा कम्पनियों के लिए भी मेडिकल एथिक्स की कोई नियमावली बनाने की मांग की है जिससे ये तय हो सके कि डाक्टरों और दवा कम्पनियों में कितनी और किस स्तर की नजदीकियां होनी चाहिए.

एक मोटे अनुमान के अनुसार एक साल में दवा कम्पनियां डाक्टरों को 18 अरब की रकम उपहार और कमीशन देने पर खर्च करती हैं.

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