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राम मंदिर के लिए अब उग्र सियासत,अयोध्या में  हुंकार रैली

राम मंदिर के लिए अब उग्र सियासत,अयोध्या में हुंकार रैली

राम मंदिर की सियासत को एक  बार फिर अदालती लड़ाई और बयानबाजी के स्तर से बाहर लाकर जमीन पर उतारने की तैयारी है ताकि अगले चुनाव में उसे कायदे से भुनाया जा सके.

संघ अब जिस तरह की रणनीतियां बना रहा है उससे साफ है कि देश में नया साल लगते लगते एक बार फिर 1992 जैसा माहौल बनाने की कोशिश जिसमें भीड़ का दवाब बनाकर अयोध्या में भगवान राम का मंदिर निर्माण शुरू किया जा सके.

इसके लिए संघ और विश्व हिन्दू परिषद ने अयोध्या और दिल्ली में 25 दिसम्बर को संत समाज के नेतृत्व में बड़ी रैलियां करने का फैसला किया है और अयोध्या में जो रैली की जाएगी उसे हुंकार रैली का नाम दिया गया है.

इस रैली की घोषणा के बाद अयोध्या विवाद में बाबरी मस्जिद के मौजूदा पैरोकार इकबार अंसारी ने खुद यह ऐलान कर दिया है कि अपनी जान-माल की सलामती के लिए वो इस रैली से पहले ही अयोध्या छोड़ देगे.

इकबार अंसारी का कहना है कि 1992 में जब बाबरी मस्जिद ढहाई गई थी तो कोई मुसलमान उसे बचाने नहीं गया था फिर  भी कारसेवकों ने तमाम मुस्लिमों की घर और दुकानों में आगजनी करने की कोशिश की थी और इस बार हालात तब से ज्यादा खराब होने का खतरा है.

उधर कानूनी मसले में भी एक नई पहल की गई है तमाम पक्षकारों ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंंत्री को दरख्वास्त भेजकर अयोध्या मामला सुप्रीम कोर्ट से लेकर एक विशेष  बेंच बनाकर उसमें सुने जाने का आग्रह किया है ताकि फैसला जल्दी आ सके.

 

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