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मुख्यमंत्री ने खेला  तेलंगाना को कांग्रेस मुक्त  करने का बड़ा खेल

मुख्यमंत्री ने खेला तेलंगाना को कांग्रेस मुक्त करने का बड़ा खेल

तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चन्द्र  शेखर  राव ने अपने राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस को बड़ा झटका देते हुए  अपने राज्य को कांग्रेस मुक्त  करने  का बड़ा दांव खेल दिया है.

इस राज्य में लोकसभा चुनावों के पहले हुए विधानसभा चुनावों में 119 में से 88 सीटें जीतकर अपनी सरकार बरकरार रखने वाली तेलंगाना राष्ट्र समिति ने एक मुश्त कांग्रेस के 12 विधायकों को तोड़ने में बड़ी कामयाबी हासिल कर ली है.

विधानसभा चुनावों में कांग्रेस यहां कुल 19 सीटें ही जीत सकी थी पर उसके एक विधायक और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष उत्तम कुमार ने सांसद बनने के बाद इस्तीफा दे दिया है जिससे उसके विधायकों की कुल संख्या 18 रह गई है.

इन 18 विधायकों में से भी एक नाटकीय घटनाक्रम के तहत 12 विधायकों ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री के बेटे के टी रामाराव से  मिलने के बाद विधानसभा अध्यक्ष के कार्यालय पहुंचे और वहां उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष को ज्ञापने देकर पूरे कांग्रेस विधायक दल का सत्तारूढ़ तेलंगाना राष्ट्र समिति में विलय करने की मांग की.

हालांकि विधानसभा अध्यक्ष ने इस पर अभी अपना फैसला  नहीं सुनाया है पर इस  बात की सम्भावना कम ही है कि वो टूट कर आने वाले  इन कांग्रेसियों विधायकों की मांग के खिलाफ जाकर कोई फैसला लेंगे.

बहरहाल अगर विधानसभा अध्यक्ष की मंजूरी मिल जाती है तो राज्य में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस के विधायको की संख्या कुल छह की रह जाएगी और केंद्र की मोदी सरकार द्वारा तय की गई परम्परा के  अनुसार तेलंगाना विधानसभा भी बिना नेता विरोधी दल के अपना कामकाज चलाएगी.

फिलहाल कांग्रेस ने इस तोड़फोड़ का सड़क पर उतर विरोध करना शुरू कर दिया है और आज कुछ विधायकों  ने काली पट्टी लगाकर विधानसभा अध्यक्ष के कार्यालय के बाहर उनकी नामौजूदगी में धरना दिया तो कुछ विधायक सड़को पर भी धरने पर बैठे.

कहा जा रहा है कि एक तिहाई से ज्यादा विधायक दल के टूटने के कारण ये कांग्रेसी विधायक दल बदल कानून से बच जाएंगे और विधानसभा अध्यक्ष इन्हें अलग गुट की मान्यता दे सकते हैं जिसका बाद में तेलंगाना राष्ट्र समिति में विलय हो जाएगा.

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