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रूस ने भारत को चीन से बेहतर मिसाइल डिफेंस सिस्टम बेचा

भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मौजूदगी में आद गुरुवार को जिस रूसी  S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम की लम्बे समय से चर्चा चल रही थी उस सौदे को अंतिम रुप दे दिया गया.

खास बात यह है कि यही डिफेंस सिस्टम रूस चीन को भी बेच रहा है पर चीन को बेचे जाने सिस्टम की मारक क्षमता जहां 250 किमी है वहीं  भारत को जो सिस्टम मिल रहा है वह 380 किमी के दायरे में मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर सकता है और वो भी मात्र पांच से दस मिनट की सूचना पर.

भारत रूस से एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम के 5 सेट खरीदेगाऔर खबर है कि भारत को रूस जो सिस्टम दे रहा है उसमें चार तरह की मिसाइलें हैं जो लगभग चार सौ से लेकर चालीस किमी तक किसी जहाज या मिसाइल को नष्ट कर सकती है जबकि चीन को जो सिस्टम मिल रहा है उसमें केवल तीन मिसाइलें हैं और उनकी मारक क्षमता 250 किमी तक  है.

कहा जा रहा है कि चीन को पूरी क्षमता का डिफेंस सिस्टम न देने का रूसी गणित यह है कि वह अपने स्तर से उसे और विस्तार देकर कहीं बड़ा खतरा न बन जाए.

अमेरिकी दबाव को नजरंदाज करके भारत ने पिछले सत्तर सालों की दोस्ती पर मुहर लगाते हुए जिस तरह रूस से ही यह सिस्टम खरीदा है उससे खुश होकर पुतिन की निजी पहल पर भारत को इस डील में कोई सत्तर हजार करोड़ की खास रियायत भी मिली है.

चीन को ये सिस्टम अगले कुछ महीनों में ही मिलना शुरु हो जाएगा पर भारत को अभी  कुछ इंतजार करना पड़ सकता है.

वैसे दोनों देशों ने इस करार को लेकर जानकारी सार्वजनिक करने में अंतर्राष्ट्रीय  कारणों से परहेज रखा है पर यह साफ है कि रूस यह सिस्टम भारत को बेच रहा है पर इसकी तकनीक नहीं और न ही भारत में इसके निर्माण करने की कोई बात शामिल है.

इस सौदे को भारतीय प्रधानमंत्री और भारत के दौरे पर आए रूसी राष्ट्रपति की अगुवाई में दिल्ली में 19वीं सालाना बैठक हुई और दोनों नेताओ ने एकांत में भी बातचीत की जिसमें इस सौदे के साथ कई और खास फैसले लिए गए.

उधर अमेरिका जो इस सौदे को लेकर लगातार सख्त  रुख अपनाए हुए था अभी सिर्फ इतना कह रहा है कि वो अपने किसी रणनीतिक सहयोगी देश के हितों के खिलाफ नहीं है पर उसका सही रुख एक दो दिन में ही साफ होगा.

 

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