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राम मंदिर का फैसला उड़ा सकता है बाबरी विध्वंस केस में भाजपा नेताओं की नींद

राम मंदिर का फैसला उड़ा सकता है बाबरी विध्वंस केस में भाजपा नेताओं की नींद

अयोध्या में राम मंदिर पर फैसला देकर भले ही सुप्रीम कोर्ट ने हिन्दू–मुस्लिमों के बीच विवाद के एक बड़े मुकदमें को समाप्त करने की कोशिश की हो पर उसने 1990 के बाबरी मस्जिद के विध्वंस मामले में भाजपा के बड़े नेताओं पर चल रहे आपराधिक मामले को अभी अभी खत्म नहीं किया है.

सच्चाई तो ये है कि इसी नौ नवम्बर 2019 को राम मंदिर बनाम बाबरी मस्जिद विवाद का फैसला सुनाते हुए देश की सर्वोच्च अदालत ने बाबरी मस्जिद ढहाए जाने को न सिर्फ गैर कानूनी करार दिया था बल्कि इसे उन्माद बढ़ाने वाली घटना बताते हुए कई सख्त टिप्पणियां की थीं.

राम मंदिर पर फैसले के बाद बाबरी मस्जिद के विध्वंस का जो मामला लखनऊ की सीबीआई कोर्ट में चल रहा है उसमें अगली मार्च-अप्रैल तक फैसला आना है और इस फैसलें में सीबीआई कोर्ट निश्चित रुप से सुप्रीम कोर्ट में की गई टिप्पणियों का अगर संज्ञान ले लेती है तो भाजपा के आडवाणी, जोशी, उमा भारती सरीखे एक दर्जन दिग्गज नेताओं को इसकी मार झेलनी पड़ सकती है.

उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या में ही मस्जिद के लिए पांच एकड़ जमीन देने के साथ साफ कहा था कि छह दिसंबर 1992 को बाबरी- मस्जिद का गिराया जाना धर्मनिरपेक्षता के  सिद्धांतों के तो विपरीत था ही साथ ही अदालत और कानून के खिलाफ था और यह किसी भी हालत में नहीं किया जाना चाहिए था।

इन्ही टिप्पणियों को आधार बनाकर मुस्लिम पर्सनल ला  और मुस्लिम पक्ष का एक हिस्सा यह मान रहा है कि जब अदालत ने मान लिया कि अयोध्या में बाबरी मस्जिद ढहाई गई तो मस्जिद की जमीन मंदिर के लिए कैसे दी जा सकती है और इसी बिना पर वो सुप्रीम कोर्ट से फैसला बदलने की गुहार करने की तैयारी कर रहे है.

ढांचा गिराने के मामले का ट्रायल लखनऊ के विशेष सीबीआई जज सुरेंद्र कुमार यादव की कोर्ट में रोजाना के आधार पर चल रहा है  और जज का कार्यकाल भी इस मामले को निपटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा ही तीस अप्रैल तक बढ़ाया  जा चुका है यानि इस मामले का फैसला भी अप्रैल या उसके पहले आना तय है तो निश्चित रूप से भाजपा के तमाम  बड़े नेताओं के दिलों की धड़कन भी बढ़ ही रही होगी.

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