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इस रफ्तार से 2022 क्या 2040 तक भी सबको घर नहीं दे सकते मोदी

इस रफ्तार से 2022 क्या 2040 तक भी सबको घर नहीं दे सकते मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 2022 तक सृभी बेघरों को घर देने का सपना शायद अभी लम्बे समय तक सपना ही रह जाएगा, हकीकतें तो यही कहती है….

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मौजूदा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भले ही इस आम चुनाव में भी 2022 तक सभी बेघरों को घर देने का चुनावी वादा करते रहें पर उनकी नीयत और इरादे ठीक होने पर भी इस तरह के वादे सपनों की बाजीगरी के अलावा कुछ नहीं हैं क्योंकि जिस रफ्तार से पिछले पांच साल काम हुआ है उस तेज रफ्तार से तो 2040 तक सबको मकान मिल पाने के आसार बनते ही नहीं है.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपनी इस योजना का सपना न सिर्फ लोगों को लगातार यह सपना दिखाते रहे हैं और उनके वादे के अनुसार पक्के- घर सिर्फ बेघरों को ही नही बल्कि उन्हें भी दिया जाएगा जो घर के नाम पर बेहद कमतर व्यवस्थाओं में रह रहे होंगे पर अपने इस दावे के बावजूद मोदी सरकार ने देश में बेघरो की संख्या का सच्चा आंकड़ा कभी देश के सामने नहीं रखा.

फिलहाल बेघरों के जो भी आंकड़े उपलब्ध हैं उनके अनुसार 2011 की जनगणना के तहत 1.2 अरब की आबादी वाले इस देश में 17.7 करोड़ बेघर हैं जिनकी वास्तविक संख्या समय के साथ निश्चितरूप से अब और बढ़ गई होगी.

शहरों के नजरिए से देखा जाए तो देश में सबसे ज्यादा बेघर यूपी के कानपुर में हैं जहां प्रति एक हजार की आबादी पर 18 लोग बेघर हैं जबकि दूसरे स्थान पर कोलकाता जहां प्रति हजार की आबादी पर 15 लोग और इसके बाद नम्बर आता है दिल्ली और फिर मुंबई.

शहरी बेघरों को घर देने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना शुरू की गई जिसमे 2022 तक 1.2 करोड़ घर बनाने का खाका तैयार किया गया पर इस शहरी आवास योजना में मार्च 2018 तक साढ़े 46 लाख घर बनने थे जिसमे से कुल 35 लाख घर ही बन सके. सरकार इसके साथ यह दावा जरुर कर रही है कि इन घरों के अलावा जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय नवीनीकरण अभियान के तहत शहरों में लम्बित 17 लाख मकानों को भी पूरा किया गया.

 

 

वैसे तो संसदीय समिति भी सरकारी कामकाज से खुश नहीं है पर अगर सरकार एक करोड़ मकान भी हर साल बनवाती है तो भी सबको घर देने में अभी भी कम से कम 17 साल का समय लग सकता है.

ग्रामीण क्षेत्र के बेघरों के लिए 2016 से 2019 के तीन सालों में एक करोड़ आवास बनाने का लक्ष्य रखा गया था और बीते साल जुलाई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दावा भी कर दिया कि ग्रामीण इलाक़ों में एक करोड़ लोगों को आवास दिए जा चुके हैं पर बीबीसी ने क्रिसिल कम्पनी के हवाले से रिपोर्ट छापी है कि अब तक 71,82,758 आवास बनाए गए हैं, जो लक्ष्य से काफी कम हैं.

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