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क्लाइमेट चेंज की असली वजह धरती का कक्षा बदलना, नासा ने भी माना

क्लाइमेट चेंज की असली वजह धरती का कक्षा बदलना, नासा ने भी माना

क्या सच में क्लाइमेट चेंज की असली वजह धरती का सूर्य के चारों तरफ घूमने के लिए अपनी कक्षा का बदलना है ना कि ग्लोबल वार्मिंग और मनुष्य द्वारा प्रकृति के साथ किए गए दूसरे खिलवाड़ जिन्हें लेकर इधर पूरी दुनिया में शोर मचता रहता है.

अमेरिकी अंतरिक्ष संगठन नासा के कुछ दस्तावेजों  और स्नूप डाट काम जैसी खोजपरक वेेबसाइटों की मानें तो न जाने क्यों इस सच्चाई को जानबूझकर छुपाया जा रहा है कि धरती के कक्षा बदलने से मौसम और पारस्थिकी में बदलाव पहले भी होता रहा है और अब एक बार अगर फिर हो रहा है तो ये बिलकुल सामान्य सी प्रकृिया है पर न जाने सारा ठीकरा लोगों पर फोड़ा जा रहा है.

दस्तावेजों की मानें तो नासा को अपनी स्थापना के साल 1958 के आसपास ही पता चल गया था कि धरती सू्र्य का चक्कर लगाने के लिए अपनी कक्षा में बदलाव कर रही है साथ ही अपनी धुरी पर उसके झुकाव में भी कुछ कमी आई है जिससे धरती के माहौल पर सीधा असर पड़ेगा जिसे लोग अब ज्यादा गर्म या ज्यादा ठंडा होना कहकर ग्लोबल वार्मिंग से जोड़ रहे हैं.

नासा ने 2000 में अपनी अर्थ आब्जर्वेटरी वेबसाइट में इस बारे में एक लेख भी प्रकाशित किया और इस प्रभाव को मिलानकोविच साइकिल कहा गया और खगोलीय भौतिकी के अनुसार हर एक लाख साल बाद धरती इसी तरह अपनी कक्षा में  गोल से अंडाकार के  बीच  दलाव करती रहती है जिसका सीधा असर धरती पर पड़ता है और यह असर इतना गहरा भी हो सकता है कि तमाम प्रजातियों का अस्तित्व ही मिट जाए क्योंकि इससे धरती पर आने वाली सूरज की किरणें सीधे प्रभावित होतीं हैं.

इसी तरह धरती की धुरी में भी लगातार बदलाव होता रहता है और हर 26 साल में एक बार यह धुरी इस तरह होती है जब धरती का उत्तरी ध्रुव एकदम उत्तर में होता है.

वैसे कुछ लोग ये सवाल भी उठा रहे हैं कि ये सारी बातें लगातार बढते तापमान को लेकर कोई सटीक व्याख्या नहीं करती वहीं ग्लोबल वार्मिंग को लेकर इस समय इतना शोर है कि कुछ लोग तो यहां तक कह रहे हैं कि लगातार बढ़ता कार्बन डाई आक्साइड का स्तर जीवन को धरती पर बहुत लम्बा चलन की अनुमति शायद न दे इसीलिए अब ग्लोबल वार्मिंग टैक्स लगाए जाने की भी बातें चल रही हैं.

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