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साठ देशों के कद्दावर नेताओं को लाजवाब कर दिया इस लड़की की लताड़ ने

साठ देशों के कद्दावर नेताओं को लाजवाब कर दिया इस लड़की की लताड़ ने

जलवायु  परिवर्तन पर दुनिया के साठ नेताओं को महज 16 साल की एक लड़की ने संयुक्त राष्ट्र के एक सम्मेलन में यह कहकर बेजुबान कर दिया कि हम से हमारे सपने- हमारा बचपन छीनकर अब भी आप लोग खोखली बयानबाजी से काम चलाने की कोशिश कर रहे हैं और दावा कर रहे हैं कि आपने दुनिया को बचाने के लिए बहुत कुछ किया है.

उल्लेखनीय है कि न्यूयार्क में जलवायु परिवर्तन पर हुए इस सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुतेरेस ने पहले ही ऐलान कर दिया था कि सिर्फ उन्हीं देशों के नेताओं को बोलने दिया जाएगा जो जब वो कार्बन उत्सर्जन पर रोक लगाने के लिए कोई कार्ययोजना भी साथ में लाए होंगे और शायद यही वजह रही कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प समेत ब्राजील सऊदी अरब के नेता इस सम्मेलन में शामिल ही नहीं हुए जबकि ट्रम्प तो थोड़ी देर के लिए दर्शक दीर्घा में आकर बैठे भी.

प्रस्तुत है ऐसे सम्मेलन में स्वीडन की 16 साल की पर्यावरण एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग का पूरा भाषण जो उसने बेहद भावुक होकर दिया–

उसने कहा, आपने अपने खोखले शब्दों से मेरे सपने और मेरा बचपना चुरा लिया है,  फिर भी मैं भाग्यशाली हूं, लोग भुगत रहे हैं- लोग मर रहे हैं…समूची पारिस्थितिकी व्यवस्था ढह रही है… हम सामूहिक विलुप्ति की चौखट पर हैं.

रुंधे गले से उसने कहा, और आप  लोग धन और  आर्थिक विकास की काल्पनिक कथाओं पर बात कर रहे हैं… आप लोगों की इतनी  हिम्मत   कैसे हो रही है?

ग्रेटा ने कहा कि 30 वर्षों में विज्ञान ने शीशे की तरह सबकुछ साफ कर दिया है फिर भी आप लोग कैेसे इतनी हिम्मत जुटा पा रहे हैं कि यह दावा कर सके कि आपने पर्याप्त काम कर लिया है.

शायद आपके लिए यह  मायने नहीं रखे कि मैं कितनी दुखी और गुस्से में हूं पर अब  मैं अब वादों पर भरोसा नहीं रख सकती क्योंकि आप लोग  लगातार विफल रहे हैं, तो कैसे माना जाए कि अब आप ठीक काम करेंगे, और इसलिए मैं यकीन करने को खारिज करती हूं.

ग्रेटा ने कहा कि 10 वर्षों में उत्सर्जन में आधी कटौती का लक्ष्य सिर्फ तापमान को 1.5 डिग्री सेल्सियस नीचे रखने में कामयाब हुआ है पर उन बदलावों का खतरा अभी 50 फीसदी ही घटा है जो  मानव नियंत्रण से पार जाकर दुनिया का नुकसान कर सकते हैं.

उसने कहा कि हो सकता है आपको यह 50 फीसदी स्वीकार हो  लेकिन हमारी नई पीढ़ी को ये पचास फीसदी का जोखिम भी स्वीकार्य नहीं है क्योंकि आपकी वजह से हमें उसके दुष्परिणामों के साथ जीना होगा.

उसका कहना है कि इसके लिए तय बजट भी कुल साढ़े आठ वर्षों में खत्म हो जाएगा और मुझे यह कहते हुए अफसोस हो रहा है कि आप अभी तक इसका मुकम्मिल समाधान सुझाने लायक भी परिपक्व नहीं हुए हैं.

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