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कच्चा तेल नहीं चुनाव तय करता है पेट्रोल-डीजल की कीमत

कच्चा तेल नहीं चुनाव तय करता है पेट्रोल-डीजल की कीमत

एक बार फिर साबित हुआ कि भारत में  पेट्रोल-डीजल की कीमतें न तो अंतर्राष्ट्रीय बाजार से तय होती है और न ही कच्चे तेल से बल्कि इसके दाम तय करने में सबसे  ज्यादा निर्णायक भूमिका चुनाव की होती है जिसकी आहट ने एक बार फिर कुछ राज्यों में लोगों को आज से पांच रुपए तक की राहत हर लीटर पर मिल  रही है.

मोदी सरकार  ने भले ही पिछले महीने ही कहा हो कि पेट्रोल डीजल पर एक्साइज़ ड्यूटी कम करने का उसका इरादा नहीं है पर महीने भर बाद ही चुनाव ने उसे अपने कार्यकाल में दूसरी बार  पेट्रोल और डीजल पर डेढ़ रुपए एक्साइज ड्यूटी घटाई है और एक रुपए की छूट देने के निर्देश तेल कम्पनियों को दिए हैं जिससे उपभोक्ताओं को कुल छूट ढाई रुपए प्रति लीटर की हो गई.

इसके बाद मोदी सरकार की सलाह पर आठ भाजपा शासित  राज्यों ने भी अपने यहां लगने वाले वैट में ढाई रुपए प्रति लीटर की छूट दे दी है जिससे पेट्रोल डीजल के दाम में लोगों को कुल राहत पांच रुपए प्रति लीटर तक  की मिल सकती है.

वहीं पहले से पेट्रोल-डीजल पर एक से दो रुपए की छूट दे चुके बंगाल, कर्नाटक, केरल आदि विपक्ष शासित राज्यों ने इस बार मोदी सरकार के आग्रह पर पेट्रोलियम उत्पादों पर अपने यहां लगने वाले कर और कम करने से इंकार कर दिया है.

यह भी सच्चाई है कि मोदी सरकार ने सत्ता सम्भालने के बाद कच्चे तेल के दामों में दुनियावी कमी का फायदा उठाते हुए चार साल  के कार्यकाल में पेट्रोल पर करों को 211 फीसदी और डीजल पर करों को 443 फीसदी बढ़ा दिया था और पहली बार अपने इन करों में राहत पिछले साल अक्टूबर में तब दी थी जब करों में डेढ़ और दो रुपए प्रति लीटर की रियायत देने का ऐलान किया था.

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