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चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर फिर सवालः बंगाल में स्थित खराब तो मोदी की रैली क्यों ?

चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर फिर सवालः बंगाल में स्थित खराब तो मोदी की रैली क्यों ?

पश्चिमी बंगाल में खराब हालत का हवाला देकर चुनाव आयोग ने वहां बीस घंटे पहले ही चुनाव प्रचार समाप्त करने के जो निर्देश जारी किए है उसपर भी राजनीतिक घमासान शुरु हो चुका है विपक्ष खुलकर आरोप लगा रहा है ऐसा फैसला चुनाव आयोग ने मोदी और अमित शाह से सलाह करके और उनके फायदे को देखते हुए ही लिया है.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल और प्रवक्ता सुरजेवाला ने अलग अलग बयान जारी करके आयोग से पूछा है कि अगर पश्चिमी बंगाल में हालत इतनी खराब है तो फिर वहां आज मोदी की रैली आयोग कैसे होने दे रहा है और क्या मोदी की रैली के बाद ही हालात इतने खराब हो जाएंगे कि वहां किसी और तरह से चुनाव प्रचार सम्भव ही नहीं होगा.

उल्लेखनीय है कि 19 मई को होने जा रहे आखिरी चरण के मतदान के लिए आयोग ने 17 मई की रात दस बजे बंद होने जा रहे चुनाव प्रचार को 16 मई की शाम पांच बजे ही रोक दिए जाने का फरमान सुनाया है जबकि 16 मई को मोदी की बंगाल मे दो रैलियां हैंं .पहली मथुरापुर और दूसरी दम दम में.

वहीं दूसरी ओर तृण मूल कांग्रेस की ओर से डेरेक ओ ब्रायन ने चुनाव आयोग मे वीडियो देकर साबित करने की कोशिश की है है भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के रोड शो में जो हिंसा भड़की वो खुद उन्होंने भड़काई थी जिसके जवाब में लोगों की तरफ से प्रतिक्रियाएं हुईं

विपक्ष का यह भी आरोप है कि अमित शाह के खिलाफ चुनाव आयोग को  कुल 17 शिकायते की गईं पर आयोग ने किसी का भी संज्ञान नहीं लिया जबकि अमित शाह की टीम की ओर से कुल एक शिकायत की गई जिस पर आयोग ने  ऐसा फैसला ले लिया जो आज तक किसी चुनाव में नहीं लिया गया था.

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