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चुनाव के घातक इफेक्टः मोदी दबाव में चुनाव आयोग दो फाड़

चुनाव के घातक इफेक्टः मोदी दबाव में चुनाव आयोग दो फाड़

इन चुनावों में राजनीति और राजनीतिज्ञ इतने हावी रहे कि इन चुनावों को निष्पक्ष कराने की जिम्मेदारी उठाने वाला चुनाव आयोग ही दो फाड़ हो गया.

तीन सदस्यीय चुनाव आयोग के एक सदस्य अशोक लवासा इस बात से शुरू से ही नाराज चल रहे थे कि चुनाव आयोग भाजपा और प्रधानमंंत्री नरेन्द्र मोदी को लेकर इतने दबाव में क्यों है.

उनका कहना है था कि भले ही हम लोग केंद्र सरकार की नौकरी करके आए हों पर आयोग कोई केंद्र सरकार के मातहत काम करने वाली संस्था नहीं है जो हम पीएम मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से जुड़ी शिकायतों पर अलग ढंग से सोचते हैं और दूसरे दलों को लेकर अलग ढंग से

पहले भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमित शाह को लेकर की गई शिकायतों पर चुनाव आयोग द्वारा क्लीन चिट दिए जाने से असहत अशोक लवासा कुछ खास नहीं बोले पर जब एक के बाद एक फैसलों में मोदी को क्लीन चिट और बाकी पर एक्शन का ढर्रा सा बन गया और तीन मई को जब चौथी बार अपने चुनावी भाषणों में सेना का इस्तेमाल करने और अमित शाह के भाषण में राहुल गांधी की वायनाड रैली के लिए यह कहे जाने पर कि पता नहीं चल रहा कि ये रैली भारत में हो रही है या पाकिस्तान में , को भी क्लीन चिट दे दी गई तो इस चुनाव आयुक्त ने अपने एतराज लिखा पढ़ी में लाने का फैसला किया.

लवासा की राय थी कि भाजपा के इन दोनों नेताओं को इस तरह क्लीन चिट दिए जाने की बजाए उन्हें नोटिस जारी किया जाना चाहिए पर मुख्य चुनाव आयुक्त ने बहुमत के आधार पर मोदी और अमित शाह को क्लीन चिट दिए जाने का ऐलान कर दिया.

इसके बाद ही चुनाव आयुक्त लवासा की वो चिठ्ठी भी मीडिया तक पहुंच गई जिसमें उन्होंने ऐलान कर दिया कि किसी फैसले को लेकर अलग उनकी राय है तो ये बताने के साथ कि ये फैसला बहुमत के आधार पर लिया गया है न्यायपालिका की तरह यह भी बताया जाए कि एक आयुक्त इस फैसले पर असहमत हैं पर मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा इसके लिए सहमत नहीं है.

उनकी इसी असहमति के कारण अशोक लवासा ने ऐलान कर दिया है कि जब तक यह तय नहीं हो जाता वे आचार संहिता को लेकर होने वाली किसी बैठक में शामिल नहीं होगे जिसका नतीजा है कि चार मई के बाद से  चुनाव आयोग की बैठक नहीं हो सकी है जबकि स्वर्गीय राजीव गांधी को भ्रष्टाचारी नम्बर  एक बताने वाले मोदी के बयान सहित आचार संहिता की कम से एक दर्जन  शिकायते चुनाव आयोग में लम्बित है.

अब मुख्य चुनाव आयुक्त ने भी बयान जारी कर दिया है कि आयोग का फैसला बताते समय यह बताना कतई जरुरी नहीं है कि उससे कौन आयुक्त असहमत है और कोई भी आयुक्त आयोग में रहते हुए अपनी असहमति को भी सार्वजनिक नहीं कर सकते.

सुनील अरोड़ा का कहना है हर चुनाव आयुक्त एक दूसरे का क्लोन नहीं हो सकता और इस मौके पर इस विवाद को खड़ा करना ठीक  नहीं है जबकि अभी 23 तारीख को मतगणना करानी है.

उधर, कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा है कि चुनाव आयोग मोदीजी का पिट्ठू बन चुका है और  लवासाजी की चिट्ठी से साफ है कि उनकी राय को मोदीजी और अमित शाह रिकॉर्ड करने को भी  तैयार नहीं हैं.

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