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दिल्ली, मुम्बई लखनऊ तक शायद मसूद अजहर धमाके देखना चाहता है चीन

दिल्ली, मुम्बई लखनऊ तक शायद मसूद अजहर धमाके देखना चाहता है चीन

जैश-ए- मोहम्मद भले ही संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित आतंकी संगठन हो पर उसके सरगना अजहर मसूद को ग्लोबल आतंकी घोषित होने से चीन ने वीटो का इस्तेमाल करके चौथी बार बचा लिया है.

चीन ने ये हिमाकत तब की है जब इस बार अजहर मसूद को ग्लोबल आतंकी घोषित करने का प्रस्ताव अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन ने रखा था और अमेरिका ने समय रहते चीन को इस बार वीटो का इस्तेमाल न करने की सलाह देते हुए ऐसा करने के खतरों से आगाह कर दिया था.

सुरक्षा परिषद में मसूद को ग्लोबल आतंकी घोषित करने के प्रस्ताव को वीटो करते समय चीन ने तर्क दिए कि अजहर मसूद का जैश संगठन से कोई वास्ता नहीं है और उस के खिलाफ कोई सबूत नहीं हैं और ऐसे में किसी राय तक पहुंचने के लिए उसे समय चाहिए ताकि वो इस प्रस्ताव पर ठीक राय कायम कर सके इसलिए इसे फिलहाल रोक दिया जाए.

जबकि इस आतंकी के खिलाफ भारत ने पाकिस्तान को जो सुबूत दिए थे उसमें एक आडियो क्लिप भी था जिसमें वो पुलवामा पर अपनी पीठ थपथपाने के साथ ही कश्मीर के सभी मुसलमानों से एक जुट होने की अपील करते हुए कह रहा था कि सब मिल जाएं तो हम कुछ महीनों में ही कश्मीर में कामयाबी हासिल कर सकते हैंं.

पांच फरवरी के इस आडियो संदेश में वो साफ कह रहा है कि अगर भारत ने कश्मीर पर अपनी दावेदारी नहीं छोड़ी तो पुलवामा मेंं दिखी इस आग का अगला निशाना दिल्ली, मुम्बई और लखनऊ होंगे.

भारत ने पाकिस्तान को जो सुबूत दिए थे उनसे ये भी साबित होता था कि कश्मीर में अपने दो भतीजों तल्हा रशीद और उसमान हैदर को भारतीय सुरक्षा बलों द्वारा मारे जाने के बाद उसने पुलवामा का हमला कश्मीर में बैठकर तय किया थाय

इनमें तल्हा तो 6 नवम्बर 2017 को मारा गया था और उस्मान अक्टूबर 2018 में और दोनों की मौत के बाद कश्मीर में जिहाद के लिए बड़े पैमाने पर कश्मीरियों की भर्ती का अभियान चलाया गया था.

आश्चर्य है कि ये आडियो संदेश जिस इंटरनेट आईडी से अपलोड किए गए थे वो पाकिस्तान में रावलपिंडी की थी और अजहर के कश्मीर में मारे गए दोनों भतीजे उसी अफजल गुरू स्क्वैड अल इस्लाम नाम के ग्रुप के संपर्क में थे जिससे जैश ने पुलवामा हमले की जिम्मेदारी ली थी.

उल्लेखनीय है कि अजहर मसूद को 1999 में भारतीय विमान के अपहरण के बाद तत्कालीन बाजपेयी ने जेल से कंधार ले जाकर छोड़ा था और तब से वो भारत में संसद पर हमले सहित पठानकोट एयरबेस, उरी में सैन्य छावनी और पुलवामा हमले जैसी बड़ी आतंकी कार्रवाइयां करवा चुका है.

दुनिया भर में इस सवाल पर भी मंथन हो रहा है कि आखिर कम्युनिस्ट चीन बार बार एक कट्टर इस्लामी आतंकी गिरोह के सरगना के लिए ढाल का काम क्यों कर रहा है जबकि अपने देश में वो इस्लाम पर हर तरह की पाबंदियां लगाता रहा है.

तमाम लोगों का तर्क है वो दक्षिण एशिया में अपना दबदबा कायम रखने या भारत को उलझाए रखने और पाकिस्तान में बने अपने आर्थिक कारीडोर को बचाने के लिए ऐसा कर रहा है.

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