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प्रसव के समय मौतः अमेरिका में बहस हमारे चर्चा तक नहीं

प्रसव के समय मौतः अमेरिका में बहस हमारे चर्चा तक नहीं

अमेरिका में हाल ही में यह आंक़ड़ा सामने आया कि शिशु जन्म के समय वहां महिलाओं के मरने की दर तमाम विकसित देशों में ज्यादा है तो उस देश में राष्ट्रीय बहस छिड़ गई पर  भारत में जहां हर पांच मिनट पर एक औरत की मौत जन्म देते समय होती है  वहां कोई इस पर बात भी नहीं करता.

हाल ही में यूएसए  टुडे और  अमेरिकी मातृ स्वास्थ्य विभाग द्वारा  कराया  गया  राष्ट्रव्यापी  अध्ययन सामने आया है जिसमें यह बताया गया है कि फ्रांस, जापान, इंग्लैण्ड,जर्मनी जैसे देशों में जहां एक लाख महिलाओं में केवल पांच से दस की ही मौत शिशु को  जन्म देते समय  होती है वहीं अमेरिका में 26 से ज्यादा महिलाएं मर  जाती है और पचास हजार को प्रसव के दौरान गम्भीर तकलीफों से जूझना पड़ता है.

इस अकेली रिपोर्ट पर अमेरिका हिल गया है और वजह तलाशी जाने लगी है कि 1990 के बाद डाक्टरों और अस्पतालों में क्या कमी आ गई जो इतनी मौते हो रही हैं और दूसरी तरफ भारत जिसे लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन रिपोर्ट दे चुका है  कि  दुनिया में प्रसव  के  दौरान मरने वाली पांच  लाख महिलाओं में से  सवा लाख से ज्यादा सिर्फ भारत में ही पर हमारे यहां  इसकी कोई चर्चा तक  नहीं होती.

वैसे विश्व स्वास्थ्य  संगठन के  आंकड़े चौकाने वाले  हैं जो कहते हैं कि भारत में नवजात की मृत्यु दर जहां 37 फीसदी है वहीं 15 फीसदी से ज्यादा महिलाएं  बच्चे के जन्म के समय मरती है,

महिलाओे की इस मौत में जन्म के समय गर्भाश्य फटने और अधिक रक्त स्राव से होने वाली  मौैते सबसे ज्यादा है और इन दोनों को बेहतर चिकित्सा सुविधाओॆं से आसानी से टाला जा सकता है.

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