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बदले हालात में अकेले  लड़कर भी यूपी में वापसी कर सकती है कांग्रेस

बदले हालात में अकेले लड़कर भी यूपी में वापसी कर सकती है कांग्रेस

मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों की सफलता ने कांग्रेसी  हौसलों को परवान चढ़ा दिया है और अब वह महागठबंधन  न बन पाने की स्थिति मेंं अकेले चुनाव लड़ने की भी सोच सकती है.

उत्तर प्रदेश में अर्से से हाशिए की राजनीति कर रही कांग्रेस में तीन राज्यों में मिली चुनावी सफलता ने नया जोश भर दिया है और उसे लग रहा है कि बदले माहौल में और अपने चुनिन्दा चेहरों  के सहारे अकेले चुनाव लड़कर भी वो अपेक्षाओं से कहीं बेहतर प्रदर्शन कर सकती है.

वैसे भी इस राज्य में कांग्रेस इतनी सिमिट चुकी है कि उसके पास खोने को ज्यादा कुछ है ही नहीं पर अगर गणित ठीक बैठ जाए तो पाने को फिर से पुरानी साख की ओर मजबूत वापसी तो है ही.

जानकार बताते हैं कि इस माहौल में अगर सपा-बसपा ने उसे  अपने गठबंधन से बाहर रखा तो भी कांग्रेस को भरोसा है कि अपने बूते ही वो इस राज्य में सबकुछ खिलाफ चला जाए तो भी कमं से कम  15 सीटें तो जीत ही जाएगी और यह सूबे की राजनीति में उसकी मजबूत वापसी की शुरुआत होगी जिसके बाद उसे आज की तरह नजरन्दाज करने का जोखिम कोई भी गैर भाजपा दल नहीं लेगा.

रायबरेली से सोनिया गांधी और अमेठी से राहुल गांधी की जीत के साथ ही इस बार कांग्रेस को सुल्तानपुर सीट से काफी उम्मीद है जहां गांधी परिवार का सीधा असर हमेशा से रहा है.

इसके अलावा  कांग्रेस अपनी जिन सीटों को बहुत मंजबूत मानकर चल रही है उसमें प्रतापगढ़  से रत्ना सिंह ,इलाहाबाद से प्रमोद तिवारी , लखीमपुर खीरी की धौहररा   से जितिन प्रसाद, बाराबंकी से पी.एल. पुनिया, गोंडा से बेनी प्रसाद वर्मा, कुशीनगर से आर.पी.एन. सिंह, सहारनपुर से इमरान मसूद, फैजाबाद से निर्मल खत्री और कानपुर से श्रीप्रकाश जयसवाल या अजय सिंह ऐसे उम्मीदवार हैं जिनका जीतना लगभग  पार्टी  तय मानकर चल रही है और ये वो नेता हैं जो अपनी सीट के अलावा आसपास की सीट पर भी असर डाल सकते हैं.

इसके अलावा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्षल  राजबब्बर भी आगरा या फिरोजाबाद  से चुनाव लड़कर अपनी सीट निकाल सकते हैं और पार्टी के कद्दावर नेता सलमान खुर्शीद की फर्रुखाबाद सीट भी पार्टी अपनी मजबूत  सीट मानकर चल रही है.

 

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