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लौह खनिज से भरी पहाड़ी अडानी ग्रुप को सौंपने के खिलाफ झारखंड में आंदोलन

लौह खनिज से भरी पहाड़ी अडानी ग्रुप को सौंपने के खिलाफ झारखंड में आंदोलन

गुपचुप तरीके से लौह खनिज से भरपूर छत्तीसगढ़ की दंतेवाड़ा स्थित बैलाडिला की पहाड़ियां  25 साल के लिए अडानी समूह को दिए जाने के खिलाफ आदिवासियों का आंदोलन शुरू हो गया है.

आदिवासी इस पहाड़ी को अपने इष्टदेवता की पत्नी का घर मानते हैं और इससे उनकी आस्थाएं जुड़ी हैं इसी कारण शुक्रवार से शुरु हुए इस आंदोलन में बड़ी संख्या में आदिवासी राशन-पानी लेकर लेकर दंतेवाड़ा, सुकुमा और बीजापुर के कोई 200 गांवों से  प्रदर्शन स्थल   राष्ट्रीय विकास निगम के स्थानीय कार्यालय के सामने  पहुंच रहे है.

उधर कम्युनिस्टों के कई गुटों ने भी इस आंदोलन को समर्थन दे दिया है जिससे आंदोलन में शामिल सभी गुटों को मिलाकर एक पंचायत समिति बनाई गई है और उसी के साए में ये आंदोलन चलाया जा रहा है.

उल्लेखनीय है कि  देश के श्रेष्ठतम लौह भंडार वाली इस  पहाड़ी पर खुदाई की इजाजत 2014 मेंं खुद केंद्र सरकार ने यह कहकर नहीं दी थी इस पर बेशकीमती और लुप्त हो रही वनस्पतियों का भंडार है और यहां खुदाई से बहुमूल्य खजाना खो जाएगा.

लेकिन इस इंकार के बाद यह तय किया गया कि  राष्ट्रीय  और छत्तीसगढ़ के खनिज निगमों के मिलाकर एक कम्पनी बनाई जाए जो खुदाई का काम नियंत्रित तरीके से शुरू करे.

यह नई कम्पनी एनसीएल बनी भी पर उसने चुपचाप 25 साल के लिए ये पहाड़ी अडानी समूह को सौंप दी है पर इसे लेकर आदिवासियों  का प्रदर्शन अब राजनीतिक रंग लेने लगा है औऱ मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जहां आदिवासियों के पक्ष में ट्वीट करके कहा है कि जंगल आदिवासियों को सौंप देने चाहिए क्योंकि हम भले वहां वन कानून लागू न कर पाते हों पर जंगल कैसे बचाया जाता है ये आदिवासी जानते हैं.

उधर छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस के नेत अजीत जोगी भी आज से इस आंदोलन से जुड़ गए है.

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