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जलियावाला बाग के सौ साल बाद भी ब्रिटेन इस पर माफी न मांगने के रुख पर कायम

जलियावाला बाग के सौ साल बाद भी ब्रिटेन इस पर माफी न मांगने के रुख पर कायम

इसी 13 अप्रैल को जलिया वाला बाग कांड नरसंहार के सौ साल हो जाएंगे पर ब्रिटेन इसे लेकर सरकारी स्तर पर माफी न मांगने के रुख पर कायम है .

ब्रिटेन कि मौजूदा प्रधानमंत्री थेरेसा मे ने  भी आज वहां की संसद मेंं इस कांड में लोगों के कत्लेआम पर गहरा दुख तो व्यक्त किया पर भारत की जनता से माफी मांगने जैसे शब्दों को बोलने से परहेज किया जबकि लगभग पूरा सदन उनसे इसकी मांग कर रहा था.

वैसे ब्रिटेन का ये रुख पुराना है और आज तक इस भयंकर नरसंहार के बावजूद ब्रिटेन की महारानी समेत किसी भी सरकार के किसी भी नुमाइंदे ने इस पर माफी नहीं मांगी है और इससे पहले 2013 मे भी ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री जेविड कैमरन जब भारत आए थे तब उन्होंने भी इस पर माफी मांगने से साफ इंकार कर दिया था.

इस कांड की सौंवी बरसी पर वहां की संसद में भारतीय मूल के सांसद ने सरकार के माफी नामे का प्रस्ताव रखा था जिस पर जूनियर विदेश मंत्री मार्क फील्ड ने बयान भी दिया था कि इस तरह के मामलों में माफीनामा प्रधानमंत्री के स्तर पर मांगा जाता है और इस पर काम हो रहा है पर आज जब वहां की प्रधानमंत्री ने बयान दिया तो गहरे अफसोस से ज्यादा कुछ कहना मुनासिब नहीं समझा.

उल्लेखनीय है जलियावाला बाग में एक मीटिंग के लिए इकठ्ठे हुए भारतीयो को जनरल डायर ने चारों तरफ से घेरकर भून दिया था जिसमें चार सौ लोगों की मौत हुई थी और दो सौ से ज्यादा लोग घायल हुए थे और इनमें मासूम बच्चे भी शामिल थे.

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