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आंख नहीं तो क्या हुआ सीधे मस्तिष्क से  देखंगे नेत्रहीन

आंख नहीं तो क्या हुआ सीधे मस्तिष्क से देखंगे नेत्रहीन

जन्मांध और पूर्ण नेत्रहीनों को आंखो की बजाए सीध मस्तिष्क से आसपास की चीजों को दिखाकर उनमें देखने की क्षमता सीमित अर्थो में विकसित करने की वैज्ञानिक कोशिशें शुरु हो गई हैं.

वैसे भी आंखे तो सिर्फ किसी कैमरे के लेंस की तरह काम करती है जिनकी मदद से आंख के पर्दे पर बन रही छवि को देखने और पहचानने का असली काम तो दिमाग ही करता है.

वैज्ञानिक अब कोशिश कर रहे हैं कि लाइलाज नेत्रहीनता को समाप्त करने के लिए ऐसे मरीजों की आप्टिक नर्व पर सीधे सिग्नल भेजे जाएं जो दिमाग द्वारा पढ़े जाएं.

इस तरह की कोशिश हांलाकि पहले भी 1920 में की गई थी पर तब कोई नतीजा नहीं निकला था पर अब नए सिरे से स्विटजरलैंड की इकोले पालीटेक्नीक फेडरले डी लासुआने यूनवर्सिटी और इटली की सेन्ट स्काउला यूनिवर्सिटी आफ एडवांस स्टडीज के वैज्ञानिकों ने एक नए तरह का कैथोड विकसित करके उससे ये प्रयोग शुरु किया है और शुरुआती नतीजे नेचर बायोमेडिकल इंजीनियरिंग जर्नल केे आनुसार निराशाजनक नहीं आए हैं.

 

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