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बंगाल बना साम्प्रदायिक राजनीति की नई प्रयोगशाला, भाजपा को चमत्कार की उम्मीद

बंगाल बना साम्प्रदायिक राजनीति की नई प्रयोगशाला, भाजपा को चमत्कार की उम्मीद

चुनावी राजनीति ने पश्चिमी बंगाल को धर्म आधारित राजनीति का न सिर्फ नया अखाड़ा बना दिया बल्कि भाजपा का मुकाबला करने के लिए ममता बनर्जी ने खुद भी साफ्ट हिन्दुत्व का जो सहारा लिया उसमें इस खेल के महारथी ने उन्हें मात  दे ही दी.

अब हालत यह है कि कोई एक तिहाई के करीब मुस्लिम आबादी वाले इस राज्य में भाजपा जहां चुनाव प्रचार के दौरान भी धर्म आधारित राजनीति को मजबूत करती चली गई तो बचाव की मुद्रा में पहुंची तृण मूल कांग्रेस बहुत कोशिशों के बाद भी उसकी वो काट नहीं ढूंढ पाई जो  इस धर्म की राजनीति को खारिज करती.

नतीजा है कि इस बार भाजपा के नेता पश्चिमी बंगाल से किसी चमत्कार जैसे चुनाव परिणामों का दावा कर  रहे हैं और 2014 के चुनावों में मात्र दो सीटें जीतने वाली भाजपा इस बार इस सूबे से कम से कम15 सीटें जीतने के काफी करीब पहुंच चुकी है.

वैसे भाजपा के नजरिए से देखा जाए तो चुनाव प्रचार शुरु होने से पहले भाजपा ने इस राज्य की 42 में से 23 सीटें जीतने का लक्ष्य तय  किया था और कोई बहुत बड़ा आश्चर्य नहीं किया जाना चाहिए अगर भाजपा इस राज्य में बीस सीटों तक भी पहुंच जाए.

दरअसल एक तय शुदा रणनीति के तहत भाजपा ने इस राज्य  को धर्म आधारित राजनीति की नई जमीन के तौर पर चुना और यह उसकी कामयाबी भी है कि उसने सोच समझकर जो जाल बिछाया उसमें ममता बनर्जी जैसी तेज-तर्रार नेता भी आसानी से फंसती चली गई.

हालत यह है कि हिन्दुत्व का जो कार्ड यहां पिछले दो सालों से भाजपा ने खेलना शुरु किया उसमें उसने हमेशा धार्मिक विवादों को लेकर ही मुद्दा बनाया और पिछले दो सालों में इसे लेकर रामनवमी समेत कई दंगे भी जमकर हुए.

भाजपा की धर्म की राजनीति के जाल में ममता बनर्जी किस तरह फंसती गई इसे समझने के लिए याद किया जा सकता है कि जब प्रधानमंत्री मोदी ने आरोप लगाया कि बंगाल में  तो दुर्गा पूजा, सरस्वती पूजा और लक्ष्मी पूजा तक की इजाजत नहीं है तो उन्हें गलत साबित करने के लिए ममता खुद मंदिरों में पूजा करने चली गईं और अपनी सभाओं में जनता से पूछना शुरु किया कि दुर्गा पूजा धूमधाम से मनाई या नहीं.

भाजपा अपने आरोपों को दोहराते दोहराते उग्र हिन्दुत्व पर उतर आई और उसने वहां धार्मिक आधारों पर जुलूस निकाले तो ममता बनर्जी की पार्टी भी साफ्ट हिन्दुत्व अपनाते हुए कुछ ऐसे ही जुलूस निकालने लगी.

लेकिन भाजपा जो इस खेल में पूरे देश में उस्ताद है उसके अध्यक्ष अमित शाह ने कुल दो दिनों पहले यह कहकर अपनी इस राजनीति को बुलंदी पर पहुंचाने की कोशिश की है बंगाल में जय श्रीराम कहना ही अपराध की श्रेणी में आता है और उन्होंने बाकायदा चुनावी सभा के मंच से कहा कि वो जयश्रीराम का नारा लगा रहे हैं ममता सरकार में हिम्मत है तो उन्हें गिरफ्तार कर जबकि जयश्रीराम कहने पर शायद ही बंगाल  में अब तक कोई गिरफ्तारी हुई हो.

बहरहाल इस राज्य में लगातार 34 साल शासन करने वाले वाम दल और कांग्रेस अब लगता है हाशिये पर चले गए हैं और कम से कम इस चुनाव में उनकी जगह भरने के लिए अपनी खास राजनीति के सहारे भाजपा आगे आ चुकी है.

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