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भाजपा के पास नवीन पटनायक से दोस्ती के अलावा चारा नहीं

भाजपा के पास नवीन पटनायक से दोस्ती के अलावा चारा नहीं

उड़ीसा में पश्चिमी बंगाल की तर्ज पर हिन्दुत्व का कार्ड खेलने की भरपूर कोशिशें करने के बाद अब लगता है कि भाजपा ने भविष्य की सम्भावनाओं को देखते हुए ही राज्य के निर्विवाद सबसे बड़े नेता नवीन पटनायक से दोस्ती करने की रणनाीति पर काम करना शुरू कर दिया है.

यह सही है कि उड़ीसा में भाजपा धीरे धीरे बढ़ तो रही है पर वहां अभी भी 19 साल से सत्ता रूढ़ नवीन पटनायक का जादू बरकरार है पर भाजपा की इन कोशिशों का इतना असर जरूर हुआ है कि दो साल पहले तक शाम सात बजे के बाद किसी से न मिलने वाले नवीन पटनायक का घर इन चुनावों में दिन रात न सिर्फ पार्टी कार्यकर्ताओं से भरा रहता है बल्कि उन्होंने भी जमकर मेहनत की है.

लेकिन इसके बाद भी 21 लोकसभा सीटों वाले उड़ीसा में भाजपा 2014 की मोदी लहर मेंं भी मात्र एक सांसद वाली पार्टी की छवि से उबर नहीं सकी पर इस बार लगातार मेहनत का कुछ ज्यादा ही पुरस्कार मिलने की उम्मीद भाजपा जरूर लगा रही है.

दरअसल पूरे देश में धमाल मचाने वाली भाजपा की इस कमजोरी की वजह पुराने इतिहास में छिपी है और अर्से तक पार्टी यहीं बीजू जनता दल की सहयोगी बनकर रही है भले ही अब तस्वीर बदली है और भाजपा ने स्थानीय निकाय चुनावों में एक तिहाई सीटें जीत रखी हैं.

यही वजह है कि हाल ही में आए तूफान के बाद उड़ीसा के दौरे पर गए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उड़ीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को लेकर वैसे आरोप नहींं लगाए जैसा वे पश्चिमी बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को लेकर लगाते रहते हैं.

भविष्य की सम्भावनाओं को ध्यान मे रखते हुए मोदी सरकार ने अपने राज्य के लिए नवीन पटनायक की तूफान को  लेकर की गई सारी मांगे भी दो कदम आगे बढ़कर मान ली हैं ताकि अगली सरकार बनाने में एक मजबूत पार्टी के नेता को साथ मिल सके क्योंकि यह साफ है कि उड़ीसा में बीजेडी ही सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आएगी.

मोदी सरकार के इस रुख पर नवीन पटनायक ने भी एक धन्यवाद का पत्र लिखकर और उसे सार्वजनिक करकेे भविष्य के तालमेल को पक्का करने का काम किया है.

उड़ीसा सरकार ने पीड़ितों के लिए पांच लाख घर बनवाने और एक हजार  किलोलीटर मिट्टी का तेल देने की मांग की थी जिसे तुरंत मंजूर कर लिया गया है.

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